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चंबल नदी: संकटग्रस्त जलीय जीवों का संरक्षण केंद्र

चंबल नदी: संकटग्रस्त जलीय जीवों का संरक्षण केंद्र

विशेष समाचार
आगरा, 02 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। चंबल क्षेत्र, जो उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के 435 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में फैला है, एक समय में डकैतों और बागियों का गढ़ था। लेकिन अब, यह अपनी स्वच्छ जल और प्राकृतिक विशेषताओं के कारण संकटग्रस्त जलीय जीवों जैसे घड़ियाल, बटागुर कछुआ, डॉल्फिन और इंडियन स्कीमर के लिए एक महत्वपूर्ण आश्रय बन गया है। पिछले एक दशक में चंबल संक्चुअरी में मगरमच्छ की संख्या दोगुनी से अधिक हुई है और चंबल में घड़ियाल और डॉल्फिन की संख्या भी धीरे-धीरे बढ़ रही है। 1979 में स्थापित राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों को सम्मिलित करता है। इसकी लंबाई लगभग 440 किलोमीटर है, जिसमें घड़ियाल, मगरमच्छ, बटागुर कछुआ और डॉल्फिन सहित जलीय जीवों के निवास स्थान हैं। घड़ियाल संरक्षण परियोजना 1981 में शुरू की गई थी, जिसके तहत चंबल नदी की जैव विविधता को ...
बिल्डर ने खोदा गहरा गड्ढा, जल प्रदूषण व सुरक्षा खतरे पर मुकदमा दर्ज

बिल्डर ने खोदा गहरा गड्ढा, जल प्रदूषण व सुरक्षा खतरे पर मुकदमा दर्ज

अपराध
नोएडा, 30 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। थाना रबूपुरा में एक उपनिरीक्षक ने रिपोर्ट दर्ज कराई है कि एक बिल्डर ने सार्वजनिक सड़क के पास बेसमेंट बनाने के लिए एक बहुत बड़ा गड्ढा खोद दिया है, जिसमें बारिश का पानी भरा हुआ है। इस पानी के कारण जल प्रदूषण बढ़ गया है और यह कीचड़ के रंग जैसा हो गया है, जिससे वायु प्रदूषण फैल रहा है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। थाना रबूपुरा के प्रभारी निरीक्षक श्याम बाबू शुक्ला ने बताया कि उप निरीक्षक आशीष यादव ने बीती रात को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है कि सेक्टर 28 डी में बिल्डर स्टार सिटी का प्रोजेक्ट चल रहा है। इसमें सार्वजनिक सड़क के किनारे एक बहुत लंबा और चौड़ा गड्ढा खुदा गया है। इसे बड़े-बड़े यंत्रों से खुदाई कर बनाया गया है, जिसमें कई महीनों से पानी भरा है। इस पानी के प्रदूषित होने के कारण और अधिक समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं, जिससे स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभ...