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नेपाल त्रासदी के बाद जहरीला हुआ पानी….. लोगों के शरीर में फेल रहा इंफेक्शन

काठमांडु। नेपाल आपदा (Nepal Disaster) के बाद भारत (India) में आया सैलाब अब दिन-ब-दिन जहरीला (Poisonous) होता जा रहा है। इसके संपर्क में आते ही लोगों के पूरे शरीर में इंफेक्शन (Infection) फैल जाता है। लोग खुजली से परेशान हैं। यह परेशानी तब और बढ़ रही है जब संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे में पहुंच रहा है। ऐसे में इसकी चेन को ब्रेक करना बेहद मुश्किल हो रहा है।


सबसे पहले इसकी चपेट में वे बुजुर्ग आए जो आपदा के बाद खेतों में काम करने गए। अब उनसे यह संक्रमण घर के दूसरे लोगों में पहुंच रहा है। शरीर में अलग-अलग जगहों पर निशान पड़ रहे है। इसकी जद में कुशीनगर और महाराजगंज के कई गांव हैं।


कई बैक्टीरिया की मौजूदगी से बढ़ रहा खतरा
महाराजगंज जिला अस्पताल के वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. एके द्विवेदी ने कहा कि पानी में ई. कोलाई और अन्य फीकल बैक्टीरिया पनपने की अधिक संभावना है। जब कोई व्यक्ति ऐसे पानी के संपर्क में आता है तो बैक्टीरिया सबसे पहले त्वचा की ऊपरी परत को कमजोर कर देता है।

कुछ दिन में ही बिगड़ रही हालत
कुशीनगर जिले के पीपरीघाट निवासी रामायण सिंह ने बताया कि खेत में काम करने के दौरान उनके पैर नेपाल से आए दूषित पानी के संपर्क में आ गए थे। इसके तुरंत बाद खुजली शुरू हो गई। सेवरही की रंभा देवी की बेटी के शरीर पर दाने हो गए हैं।


चीन ने 12 दिन बाद मीडिया को जाने की दी इजाजत
आपदा के 12वें दिन चीन ने पहली बार कुछ विदेशी मीडिया संस्थानों को गिरयोंग काउंटी जाने की अनुमति दी। अब चीन के सीमावर्ती इलाके में तबाही की असली तस्वीर सामने आई। यह आव्रजन चौकी बुरी तरह तबाह हो चुकी है। यहां तक कि यह पता लगाना भी मुश्किल है कि इसका ढांचा कहां पर खड़ा था।


नेपाल में जलप्रलय : 12 दिन बीते
नेपाल में अचानक बाढ़ से मची तबाही के 12 दिन बीतने बाद भी प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति विकट बनी हुई है। राहत एवं बचाव कार्य बदस्तूर जारी है। मलबे को हटाने, सड़कों को दुरुस्त करने और संचार व्यवस्था को पटरी पर लाने के प्रयास युद्धस्तर पर जारी हैं। नेपाली सेना और इंजीनियरों की टीम अस्थायी पुल बनाने और प्रभावित लोगों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाने में जुटी है। अपेक्षाकृत कम प्रभावित क्षेत्रों में कुछ लोग घरों की ओर लौटे हैं और अपनों को खोने के दर्द के बीच जिंदगी को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश में जुटे हैं। अपने टूटे-फूटे घरों को फिर से ठीक करके रहने लायक बना रहे हैं।


एक बड़ा इलाका ऐसा है जहां मलबे के ढेर के अलावा कुछ नहीं बचा है। लोग इसमें अपना बचा-खुचा सामान तलाश रहे हैं। उनका कहना है कि समझ ही नहीं आ रहा कि जिंदगी फिर कहां से शुरू करें।


खुद बचे, अब राहत अभियान में जुटे
सुदीप कुमार न्यौपाने (31) विनाशकारी बाढ़ में बाल-बाल बच गए थे, लेकिन उनके छोटे भाई और एक करीबी सहयोगी लापता हैं। न्यौपाने अब राहत कार्यों में शामिल हो गए और रसुवा में विस्थापित लोगों के बीच भोजन तथा अन्य जरूरी सहायता सामग्री के वितरण में मदद कर रहे हैं।


परिवार को खोने का दर्द भुला नहीं पा रहे
नुवाकोट के सुचित जोशी भी लगातार खोज एवं बचाव अभियान में मदद कर रहे हैं, जबकि उनके अपने परिवार के चार सदस्य पत्नी, सात वर्षीय बेटी, भाभी और भतीजा अब भी लापता हैं। जोशी सुरक्षाबलों के जवानों के साथ मिलकर अपने लापता परिजनों की तलाश भी जारी रखे हुए हैं। उन्होंने कहा, मैं इस दर्द को सह रहा हूं और फिर भी बचाव कार्य जारी रखे हूं।


77 में दो जिले सबसे ज्यादा प्रभावित
नेपाल में प्रलयकारी बाढ़ ने मध्य-उत्तर और नेपाल-तिब्बत सीमा से लगे क्षेत्रों को प्रभावित किया। देश के कुल 77 जिलों में से दो जिलों रसुवा और नुवाकोट में मलबे ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई। इसके अलावा धाडिंग, चितवन, गोरखा, तनहुं. नवलपरासी (पूर्व और पश्चिम) में भी स्कूलों, घरों-दुकानों को नुकसान पहुंचा।


आंकड़े
1344 लोगों की मौत
5000 अब भी लापता
7,570 घर टूटे या क्षतिग्रस्त
55 किलोमीटर सड़कें बहीं
37 सड़क पुल ध्वस्त हुए


नेपाल की अपील-बाकी हिस्सों की यात्रा में न हिचकें पर्यटक
नेपाल ने मित्र देशों से अपील की है कि वे अपने नागरिकों के लिए यात्रा परामर्श केवल बाढ़ प्रभावित विशिष्ट क्षेत्रों तक ही सीमित रखें। साथ ही, स्पष्ट किया कि देश का शेष हिस्सा यात्रा एवं पर्यटन के लिए खुला और सुरक्षित है।

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