अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन के मामले की जांच तेज करते हुए पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार आरोपियों के ठिकानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया। स्थानीय मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कई पुलिस टीमों ने सात आरोपियों के घरों और अन्य परिसरों की एक साथ तलाशी ली। इस दौरान संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों के अलावा नकदी, सोने-चांदी के आभूषण और सिक्के भी बरामद किए गए, जिनकी जांच की जा रही है।
सुबह से शाम तक चला तलाशी अभियान
जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, सीओ अयोध्या आशुतोष तिवारी के नेतृत्व में गठित छह टीमों ने रविवार सुबह करीब सात बजे अभियान शुरू किया। प्रत्येक टीम के साथ राजस्व विभाग के एक लेखपाल और महिला पुलिसकर्मी भी मौजूद थीं। कार्रवाई देर शाम तक जारी रही।
पुलिस ने रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, रामाशंकर मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय से जुड़े परिसरों की तलाशी ली। तलाशी के दौरान परिवार के सदस्यों से भी कई घंटे तक पूछताछ की गई।
संपत्तियों और लेनदेन की होगी पड़ताल
पुलिस ने स्वर्गद्वार मोहल्ले, मीरापुर, कौशलपुरी फेज-2 समेत विभिन्न स्थानों पर स्थित आरोपियों के घरों और अन्य ठिकानों की जांच की। अधिकारियों के मुताबिक, बरामद दस्तावेजों के आधार पर आरोपियों की चल और अचल संपत्तियों, आय के स्रोत तथा कथित वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों को जब्त कर लिया गया है और अब उनकी जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
न्यायिक हिरासत में हैं सभी आरोपी
मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों को अयोध्या की अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस आवश्यकता पड़ने पर अदालत से उनकी रिमांड भी मांग सकती है। गिरफ्तार आरोपियों में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामाशंकर उर्फ टिन्नू यादव शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, इन सभी की ड्यूटी मंदिर में दान के रूप में प्राप्त नकदी और अन्य कीमती वस्तुओं की गणना से संबंधित कार्य में लगी थी।
अब तक लाखों रुपये बरामद होने का दावा
अभियोजन पक्ष के अनुसार, जांच के दौरान अब तक 79.85 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की चोरी, कर्मचारी द्वारा चोरी, आपराधिक न्यासभंग, चोरी का माल रखने और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित धाराओं के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।
यह एफआईआर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर दर्ज की गई थी। राज्य सरकार ने मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन के आरोप सामने आने के बाद एसआईटी का गठन कर मामले की जांच शुरू कराई थी। फिलहाल पुलिस पूरे प्रकरण के वित्तीय और दस्तावेजी पहलुओं की विस्तृत जांच में जुटी हुई है।
