Friday, July 24खबर जो असर करे |
Shadow

अंतरराष्ट्रीय

IMF की रिसर्च में ट्रंप की टैरिफ नीति पर सवाल, कहा- कीमतें नहीं घटीं, अमेरिका को मिली कम गुणवत्ता वाली वस्तुएं

IMF की रिसर्च में ट्रंप की टैरिफ नीति पर सवाल, कहा- कीमतें नहीं घटीं, अमेरिका को मिली कम गुणवत्ता वाली वस्तुएं

अंतरराष्ट्रीय, आर्थिक
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अर्थशास्त्रियों की एक रिसर्च ने कई महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने रखे हैं। अध्ययन के अनुसार, 2025 में लगाए गए व्यापक आयात शुल्क से विदेशी निर्यातकों ने अपनी कीमतों में अपेक्षित कटौती नहीं की। इसके बजाय अमेरिका में आयात का स्वरूप बदल गया और आयातक अपेक्षाकृत कम कीमत तथा कम गुणवत्ता वाले उत्पादों की ओर मुड़ गए। आईएमएफ के वर्किंग पेपर में कहा गया है कि टैरिफ का उद्देश्य विदेशी कंपनियों को कीमतें घटाने के लिए मजबूर करना था, लेकिन व्यवहार में इसका असर सीमित रहा। विदेशी निर्यातकों ने कीमतों में नहीं की बड़ी कटौती रिसर्च के मुताबिक, अमेरिकी टैरिफ लागू होने के बाद भी अधिकांश विदेशी निर्यातकों ने अपने उत्पादों की मूल कीमतों में उल्लेखनीय कमी नहीं की। इसके चलते आयात शुल्क का बड़ा हिस्सा अमेरिकी आया...
IMF की रिसर्च में ट्रंप की टैरिफ नीति पर सवाल, कहा- कीमतें नहीं घटीं, अमेरिका को मिली कम गुणवत्ता वाली वस्तुएं

IMF की रिसर्च में ट्रंप की टैरिफ नीति पर सवाल, कहा- कीमतें नहीं घटीं, अमेरिका को मिली कम गुणवत्ता वाली वस्तुएं

अंतरराष्ट्रीय
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अर्थशास्त्रियों की एक रिसर्च ने कई महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने रखे हैं। अध्ययन के अनुसार, 2025 में लगाए गए व्यापक आयात शुल्क से विदेशी निर्यातकों ने अपनी कीमतों में अपेक्षित कटौती नहीं की। इसके बजाय अमेरिका में आयात का स्वरूप बदल गया और आयातक अपेक्षाकृत कम कीमत तथा कम गुणवत्ता वाले उत्पादों की ओर मुड़ गए। आईएमएफ के वर्किंग पेपर में कहा गया है कि टैरिफ का उद्देश्य विदेशी कंपनियों को कीमतें घटाने के लिए मजबूर करना था, लेकिन व्यवहार में इसका असर सीमित रहा। विदेशी निर्यातकों ने कीमतों में नहीं की बड़ी कटौती रिसर्च के मुताबिक, अमेरिकी टैरिफ लागू होने के बाद भी अधिकांश विदेशी निर्यातकों ने अपने उत्पादों की मूल कीमतों में उल्लेखनीय कमी नहीं की। इसके चलते आयात शुल्क का बड़ा हिस्सा अमेरिकी आया...
जेडी वेंस बने चौथी बार पिता, बेटे के जन्म के साथ 156 साल पुराना अमेरिकी रिकॉर्ड भी टूटा

जेडी वेंस बने चौथी बार पिता, बेटे के जन्म के साथ 156 साल पुराना अमेरिकी रिकॉर्ड भी टूटा

अंतरराष्ट्रीय
वॉशिंगटन। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और सेकंड लेडी उषा वेंस के परिवार में नए सदस्य का आगमन हुआ है। रविवार को दंपति ने अपने चौथे बच्चे, एक बेटे, के जन्म की जानकारी साझा की। इस जन्म के साथ ही जेडी वेंस अमेरिकी इतिहास में पिछले 156 वर्षों के दौरान पद पर रहते हुए पिता बनने वाले पहले उपराष्ट्रपति बन गए हैं। जेडी वेंस और उषा वेंस ने सोशल मीडिया पर जारी संयुक्त बयान में बताया कि उनके बेटे का नाम ऐलेक नील वेंस रखा गया है। उन्होंने लिखा कि मां और नवजात दोनों स्वस्थ हैं तथा परिवार के अन्य बच्चे भी अपने छोटे भाई के आने से बेहद उत्साहित हैं। 156 साल बाद दोहराया गया इतिहास अमेरिकी इतिहास के अनुसार, इससे पहले किसी कार्यरत उपराष्ट्रपति के घर संतान का जन्म वर्ष 1870 में हुआ था। उस समय तत्कालीन उपराष्ट्रपति स्कायलर कोलफैक्स और उनकी पत्नी एलेन वेड कोलफैक्स के यहां बेटे का जन्म हुआ था। इससे प...
गुयाना में बड़ा हादसा…. अटलांटिक तट पर 133 लोगों से भरा सरकारी जहाज समुद्र में पलटा

गुयाना में बड़ा हादसा…. अटलांटिक तट पर 133 लोगों से भरा सरकारी जहाज समुद्र में पलटा

अंतरराष्ट्रीय
जॉर्जटाउन। दक्षिण अमेरिकी देश गुयाना (South American country Guyana) के अटलांटिक तट पर रविवार को बड़ा समुद्री हादसा (Major maritime accident) हो गया। 133 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को लेकर जा रहा सरकारी जहाज एमवी बरीमा (Government ship MV Barima) समुद्र में पलट गया। अब तक 67 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि कई यात्री अब भी लापता हैं। उन्हें खोजने के लिए बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। आधी रात को आया संकटएमवी बरीमा शनिवार दोपहर करीब तीन बजे राजधानी जॉर्जटाउन से पोर्ट कैतुमा के लिए रवाना हुआ था। यह जहाज वेनेजुएला सीमा के पास रहने वाले स्वदेशी समुदायों के लिए नियमित सेवा देता है। रात करीब 11 बजे जहाज से आपातकालीन संदेश मिला। इसके बाद सरकारी एजेंसियों और निजी नावों को तुरंत मौके पर भेजा गया। अधिकारियों के अनुसार, हादसा पोमेरून नदी के पास उत्तरी अटलांटिक तट पर ह...
Iran-America जंग का असर…. फिर बढ़ने लगी कच्चे तेल की कीमत….

Iran-America जंग का असर…. फिर बढ़ने लगी कच्चे तेल की कीमत….

अंतरराष्ट्रीय, आर्थिक, राष्ट्रीय
नई दिल्ली। ईरान-अमेरिका (Iran-America War) में जंग और तेज होने की वजह से कच्चे तेल के दाम (Crude oil prices) एक महीने के हाई पर पहुंच गए हैं। अब यह तेजी से 100 डॉलर की ओर बढ़ रहा है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक ब्रेंट क्रूड की कीमत 3.8% तक बढ़कर 91 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई। ईरानी मीडिया के अनुसार, अमेरिकी सेना ने फारस की खाड़ी के केश्म द्वीप और ईरान के दक्षिणी शहरों जैसे शादेगान, सिरिक और हाजीआबाद पर हमले किए। अमेरिकी हमलों के बाद 20 जुलाई की सुबह ब्रेंट क्रूड 2.78 डॉलर चढ़कर 90.55 डॉलर प्रति बैरल पर ट्र्रेड कर रहा था। जबकि, WTI 2.39 डॉलर चढ़कर 84.46 डॉलर प्रति बैरल पर था। इससे पहले वाले युद्ध के दौरान ब्रेंट क्रूड 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, जबकि WTI 119 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया था। राहत की बात यह है कि भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आज भी कोई बदलाव नहीं हुआ है। सब...
ईरान-US संघर्ष खतरनाक मोड़ पर….. इस बार हॉर्मुज में तेल नहीं, पानी के लिए छिड़ी भीषण जंग

ईरान-US संघर्ष खतरनाक मोड़ पर….. इस बार हॉर्मुज में तेल नहीं, पानी के लिए छिड़ी भीषण जंग

अंतरराष्ट्रीय, आर्थिक
वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच चल रहा सैन्य टकराव (Military confrontation) अब तेल के कुओं और सैन्य ठिकानों से आगे बढ़कर एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। दोनों देशों के बीच जून में हुआ इस्लामाबाद समझौता (Islamabad Agreement) पूरी तरह से टूट चुका है और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में फिर से भीषण जंग छिड़ गई है। इस बार दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को घुटनों पर लाने के लिए पानी से जुड़े बुनियादी ढांचे यानी पानी के सप्लाई सिस्टम को अपना मुख्य निशाना बनाया है। पारंपरिक हवाई हमलों के साथ-साथ अब पानी साफ करने वाले प्लांटों को नष्ट करने की होड़ मची है, जिसने सीधे तौर पर आम नागरिकों की जिंदगी को दांव पर लगा दिया है। पानी को क्यों बनाया जा रहा है युद्ध का नया मैदान?फारस की खाड़ी दुनिया के उन चुनिंदा हिस्सों में से है, जहां प्राकृतिक रूप से पीने का पानी न के बराबर...
हांगकांग पर बदले अमेरिका के सुर: चीन का बड़ा दावा, क्या अब खत्म होगी कारोबारी तनातनी और मिलेगी राहत?

हांगकांग पर बदले अमेरिका के सुर: चीन का बड़ा दावा, क्या अब खत्म होगी कारोबारी तनातनी और मिलेगी राहत?

अंतरराष्ट्रीय
हांगकांग। मैड्रिड वार्ता के बाद अमेरिका और चीन के बीच रिश्तों में सुधार के संकेत मिले हैं। हांगकांग से जुड़े पुराने अमेरिकी कार्यकारी आदेश को आगे नहीं बढ़ाने के दावे ने व्यापारिक संबंधों में नई उम्मीद जगाई है। हालांकि प्रतिबंध पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं, लेकिन यह कदम दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग और संभावित व्यापारिक राहत का संकेत माना जा रहा है।अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से चल रही व्यापारिक तनातनी अब कम होती नजर आ रही है। मैड्रिड में हुई आर्थिक वार्ता के बाद चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने दावा किया है कि अमेरिका उस पुराने कार्यकारी आदेश को आगे नहीं बढ़ाएगा, जिसके तहत हांगकांग का विशेष व्यापारिक दर्जा खत्म किया गया था। इस फैसले को दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।क्या ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात का असर दिखने लगा?दो महीने पहले बीजिंग में अमेरिकी राष्ट...
ईरान का बड़ा दावा: बहरीन में अमेरिकी ड्रोन ठिकाने और AI केंद्र पर मिसाइल हमला, स्वतंत्र पुष्टि नहीं

ईरान का बड़ा दावा: बहरीन में अमेरिकी ड्रोन ठिकाने और AI केंद्र पर मिसाइल हमला, स्वतंत्र पुष्टि नहीं

अंतरराष्ट्रीय
तेहरान/वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और सेना ने कहा है कि उन्होंने बहरीन, इराक और हिंद महासागर क्षेत्र में अमेरिकी हितों को निशाना बनाते हुए कई सैन्य अभियान चलाए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही अमेरिका या बहरीन की ओर से तत्काल आधिकारिक पुष्टि जारी की गई है। बहरीन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, IRGC ने बहरीन में स्थित अमेरिकी सेना के मानवरहित विमान (UAV) संचालन से जुड़े एक ठिकाने पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया। संगठन का दावा है कि इस कार्रवाई में अमेरिकी ड्रोन डिपो को भारी नुकसान पहुंचा। ईरान ने यह भी दावा किया कि बहरीन के...
‘हमारे टर्मिनल को कोई नुकसान नहीं’, चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी हमले के बाद भारत का बड़ा बयान

‘हमारे टर्मिनल को कोई नुकसान नहीं’, चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी हमले के बाद भारत का बड़ा बयान

अंतरराष्ट्रीय, आर्थिक
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि ईरान में अमेरिकी हमलों के बावजूद भारत द्वारा संचालित चाबहार बंदरगाह के 'शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल' को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. अप्रैल में अमेरिकी प्रतिबंधों की छूट खत्म होने के बाद भारत इस मुद्दे पर संबंधित पक्षों से बातचीत कर रहा है.ईरान के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह पर इस सप्ताह हुए अमेरिकी हवाई हमलों के बाद भारत सरकार ने एक बड़ा और राहत भरा बयान जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बावजूद चाबहार बंदरगाह के 'शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल' को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. इस टर्मिनल का संचालन भारत द्वारा किया जाता है. इससे पहले अमेरिकी अधिकारियों ने स्वीकार किया था कि ईरान के खिलाफ चल रहे उनके नए सैन्य अभियान के तहत इस सप्ताह चाबहार बंदरगाह को निशाना बनाया गया था. चाबहा...
Pak: आतंकी संगठनों में अब महिलाओं की हो रही भर्ती… हनी ट्रैप की भी दी जा रही ट्रेनिंग

Pak: आतंकी संगठनों में अब महिलाओं की हो रही भर्ती… हनी ट्रैप की भी दी जा रही ट्रेनिंग

अंतरराष्ट्रीय
नई दिल्ली। भारत (India) की केंद्रीय खुफिया एजेंसियों (Intelligence agencies) के ताजा आकलन में पाकिस्तान (Pakistan) स्थित आतंकी संगठनों (Terrorist organizations) की रणनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। खुफिया इनपुट के अनुसार, आतंकी संगठन अब महिलाओं की सुनियोजित तरीके से भर्ती के लिए गुप्त प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहे हैं। इन प्रशिक्षण मॉड्यूल का उद्देश्य महिलाओं को आतंकवादी नेटवर्क में अलग-अलग भूमिकाओं के लिए तैयार करना है। ये प्रशिक्षण कार्यक्रम 2 से 4 सप्ताह तक चलते हैं और इन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण तथा जीवन कौशल सिखाने के नाम पर आयोजित किया जाता है। हालांकि, वास्तविक मकसद महिलाओं को आतंकी संगठनों के लिए तैयार करना है। एजेंसियों के अनुसार, इन कार्यक्रमों के लिए बैच बनाए जाते हैं। कुछ चुनिंदा मदरसों को भी इस अभियान का हिस्सा बनाया जाता है। इन स्थानों पर आने वाली महिला परिजनों के जरिए ...