प्राकृतिक संसाधन: सृष्टि की साझा धरोहर, मानवता का नैतिक न्यास दायित्व
कैलाश चन्द्र
पृथ्वी पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन जल, वायु, वन, खनिज, मिट्टी, जीव–जंतु और ऊर्जा स्रोत मानवता की निजी संपत्ति न होकर संपूर्ण सृष्टि की साझा धरोहर हैं। यह विचार केवल नैतिक आग्रह नहीं है, बल्कि पृथ्वी के भूगर्भीय इतिहास, जैविक विकास और आधुनिक वैज्ञानिक समझ का गहन निष्कर्ष है। विज्ञान स्पष्ट करता है कि जिन ऊर्जा स्रोतों पर आधुनिक सभ्यता आधारित है, वे मानव जीवन की समय-सीमा में पुनः निर्मित नहीं हो सकते। पेट्रोलियम को बनने में पांच से 30 करोड़ वर्ष, कोयले को तीन से 40 करोड़ वर्ष और प्राकृतिक गैस को करोड़ों वर्षों का समय लगता है। पृथ्वी की विशाल प्रयोगशाला ने जिन्हें युगों में निर्मित किया, उन्हें मनुष्य यदि कुछ वर्षों के युद्ध, संघर्ष या लालच में नष्ट कर दे, तो यह न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से मूर्खता है बल्कि नैतिक रूप से भी गंभीर अन्याय है।
भारतीय चिंतन इस सत्य को प्राचीन क...









