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भारत कैसे बनेगा सिरमौर…जयशंकर बोले- देश की कूटनीति अब निष्क्रिय के बजाय सक्रिय

कोलकाता। विदेश मंत्री एस. जयशंकर (External Affairs Minister S. Jaishankar) ने शनिवार को आईआईएम-कलकत्ता (IIM-Calcutta) से मानद डॉक्टरेट प्राप्त करने के बाद अपने संबोधन में कहा कि राजनीति तेजी से अर्थशास्त्र पर हावी होती जा रही है। उन्होंने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए भारत (India) के आपूर्ति स्रोतों में विविधीकरण के महत्व पर जोर दिया। जयशंकर ने कहा, “यह एक ऐसा दौर है जहां राजनीति तेजी से अर्थशास्त्र पर हावी होती जा रही है और यह कोई मजाक नहीं है। एक अनिश्चित दुनिया में अपनी राष्ट्रीय जरूरतों की गारंटी के लिए आपूर्ति स्रोतों में लगातार विविधीकरण करना और भी महत्वपूर्ण है।”


यह टिप्पणी अमेरिका (America) के संदर्भ में आई है, जिसने हाल ही में भारत से आयात पर 50% की दर सहित उच्च टैरिफ लगाए हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America), जो लंबे समय से समकालीन प्रणाली का गारंटर रहा है, अब जुड़ाव के मौलिक रूप से नए नियम निर्धारित कर रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब देशों के साथ वन-ऑन-वन आधार पर व्यवहार कर रहा है।


भारत और अमेरिका वर्तमान में दो समानांतर ट्रैक पर बातचीत कर रहे हैं। एक टैरिफ मुद्दों का हल निकलाने के लिए और दूसरा व्यापक व्यापार समझौते को स्थापित करने के लिए। वर्तमान में दोनों देशों का लक्ष्य 191 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 500 बिलियन डॉलर करना है। अमेरिकी भारत के कृषि और उच्च तकनीक बाजारों तक अधिक पहुंच चाहता है। वहीं भारत की मांग है कि भारतीय पेशेवरों के लिए बेहतर गतिशीलता (Mobility), डिजिटल व्यापार और डेटा प्रवाह पर स्पष्ट नियम बनाए जाएं। अधिकारियों का कहना है कि भारत 50% अमेरिकी टैरिफ के सबसे बुरे प्रभाव से बच गया है और अधिक अनुकूल सौदे के लिए इंतजार करने को तैयार है।


जयशंकर ने अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के व्यवहार पर भी बात की। उन्होंने कहा कि चीन लंबे समय से अपने ही नियमों से खेलता रहा है और ऐसा करना जारी रखे हुए है, जिससे एक खंडित वैश्विक परिदृश्य बन रहा है। इस अनिश्चितता के कारण कई देश अपनी रणनीतियों को “हेजिंग” कर रहे हैं। वे किसी भी प्रतिकूल परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयारी कर रहे हैं और स्पष्ट प्रतिस्पर्धा पर ध्यान देने के बजाय सौदों और आपसी समझ पर जोर दे रहे हैं।


जयशंकर ने आत्मनिर्भरता और मजबूत औद्योगिक नींव की ओर भारत के बढ़ते अभियान पर जोर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत जैसी एक प्रमुख शक्ति के पास एक महत्वपूर्ण औद्योगिक आधार होना चाहिए। इस महत्वाकांक्षा को प्राप्त करने के लिए सेमीकंडक्टर से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन, ड्रोन और बायोसाइंसेज तक उन्नत विनिर्माण को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वैश्विक उत्पादन का एक तिहाई अब चीन में केंद्रित है, जिससे सप्लाई चेन का लचीलापन और भी महत्वपूर्ण हो गया है।


जयशंकर ने कहा कि देश जब 2047 तक विकसित भारत की योजना बना रहा है, तो विदेश नीति का उद्देश्य भारत की वैश्विक पदचिह्न को बढ़ाना होगा और भारत की कूटनीति अब निष्क्रिय के बजाय सक्रिय है।

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