कोपेनहेगन। यूरोप (Europe) में अवैध प्रवासियों (Illegal Migrants) और बिना कानूनी अनुमति के रह रहे लोगों पर शिकंजा कसने की तैयारी तेज हो गई है। डेनमार्क (Denmark) की मेजबानी में हुई बैठक में जर्मनी, ऑस्ट्रिया, ग्रीस, डेनमार्क और नीदरलैंड के समूहों ने बड़ा कदम उठाया है। इन पांच देशों ने यूरोपीय संघ (European Union) से बाहर के किसी देश में रिटर्न हब (प्रवासी वापसी केंद्र) बनाने को लेकर ठोस सहमति जताई है।
जर्मनी के गृह मंत्री एलेक्जेंडर डोब्रिंडट ने कोपेनहेगन में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इन देशों का लक्ष्य इसी साल ऐसे तीसरे देशों के साथ समझौते को अंतिम रूप देना है। हालांकि, अभी उन देशों के नामों का खुलासा नहीं किया गया है जहां ये केंद्र बनाए जाएंगे। यूरोपीय संसद ने जून में नई प्रवासन नीति को मंजूरी दी थी।
मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता
इस योजना को लेकर मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई है। काउंसिल ऑफ यूरोप ने इन केंद्रों को मानवाधिकारों के लिए जोखिम भरा बताया है। वहीं, डेनिश रिफ्यूजी काउंसिल की महासचिव शार्लोट स्लेंटे का कहना है कि इससे प्रवासियों के खतरनाक रास्ते नहीं रुकेंगे। डेनमार्क के आव्रजन और एकीकरण मंत्री मोर्टन बोद्स्कोव ने उम्मीद जताई है कि साल 2027 के अंत तक प्रवासियों को भेजने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इस पूरी योजना पर चर्चा के लिए यह समूह सितंबर के अंत में जर्मनी के म्यूनिख में फिर बैठक करेगा।
