Wednesday, September 2खबर जो असर करे |
Shadow

CGPSC Scam: छत्तीसगढ़ में पूर्व CM भूपेश बघेल के PA के घर समेत 7 जगह ED का छापा

रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) आज राज्यभर में सात जगहों पर एक साथ छापेमारी (ED Raids) कर रही है। ईडी की टीमें जिन जगहों पर छापेमारी कर रही हैं उनमें छत्तीसगढ़ (Chhatisgarh) के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Former Chief Minister Bhupesh Baghel) के पर्सनल असिस्टेंट (PA) केके चंद्राकर का घर भी शामिल है। ईडी की यह जांच 2020 और 2021 में आयोजित CGPSC राज्य सेवा परीक्षाओं के पेपर लीक होने और उनमें गड़बड़ी के आरोपों से जुड़ी है।


अधिकारियों ने बताया कि ईडी के रायपुर जोनल ऑफिस ने कुछ संदिग्धों के ठिकानों के बारे में मिली जानकारी के आधार पर मंगलवार सुबह कुछ सर्च ऑपरेशन चलाया। ईडी द्वारा सुरक्षा बलों और राज्य पुलिस के साथ मिलकर यह छापेमारी की जा रही है।


यह छापेमारी छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के पूर्व चेयरमैन तमन सिंह सोनवानी की गिरफ्तारी के लगभग एक महीने बाद हुई है। ईडी ने सोनवानी को 25 जुलाई को परीक्षा का पेपर लीक होने के कथित मामले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया था।


तमन सिंह सोनवानी की गिरफ्तारी के वक्त ईडी के अधिकारियों ने बताया कि वह एजेंसी की पूछताछ के दौरान टालमटोल करते रहे।


सीबीआई ने दो साल पहले दर्ज की थी एफआईआर
ईडी का मनी लॉन्ड्रिंग का मामला सीबीआई द्वारा 2024 में दर्ज की गई FIR से जुड़ा है। वहीं सीबीआई का यह केस छत्तीसगढ़ पुलिस की उस शिकायत पर आधारित था, जो नवंबर 2023 में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हार के बाद भाजपा के राज्य की सत्ता में लौटने के बाद दर्ज की गई थी। सीबीआई ने इस मामले में 2024 में सोनवानी को भी गिरफ्तार किया था।


सोनवानी पर रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने का आरोप
ईडी का आरोप है कि सोनवानी ने गैर-कानूनी फायदे के बदले पेपर लीक करने में मदद की और चयन प्रक्रिया में हेरफेर किया, जिससे कथित तौर पर उनके रिश्तेदारों और रिश्वत देने वाले उम्मीदवारों को फायदा हुआ। एजेंसी के मुताबिक, 2021 में CGPSC भर्ती नियमों में बदलाव करके परिवार के सदस्यों की परिभाषा से ‘भतीजे’ (Nephew) शब्द को हटा दिया गया था। आरोप है कि ऐसा इसलिए किया गया था, ताकि सरकारी पदों के लिए सोनवानी के रिश्तेदारों के चयन में आसानी हो सके।


सीएसआर के जरिये रिश्वत लेने का भी आरोप
एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि रिश्वत का कुछ हिस्सा नकद में लिया गया और बाकी हिस्सा एक परिवार के कंट्रोल वाली ‘समिति’ के जरिये एक ऐसे कॉलेज को कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) डोनेशन के नाम पर लिया गया, जो ‘अस्तित्व’ में ही नहीं है।


ईडी का दावा है कि एक प्राइवेट कंपनी ने डिप्टी कलेक्टर के पद के लिए दो उम्मीदवारों के चयन को प्रभावित करने के बदले में इस तरीके से कथित तौर पर लगभग 45 लाख रुपये का लेन-देन किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *