‘द राजा साब’ में भावनाओं की जीत, एक्शन के बीच क्लाइमेक्स बना सबसे मजबूत हिस्सा
फ़िल्म 'द राजा साब' की कहानी दक्षिण भारत के एक गांव से शुरू होती है, जहां आर. राजू (प्रभास) अपनी दादी गंगादेवी (ज़रीना वहाब) के साथ बेहद साधारण और संघर्षभरी ज़िंदगी जीता है। कभी एक समृद्ध ज़मींदार परिवार से ताल्लुक रखने वाला यह घर आज अतीत की परछाइयों में सिमट चुका है। गंगादेवी की हालत उस दिन से बिगड़ने लगती है, जब एक पवित्र देवी का हार चोरी हो जाता है और उसे ढूंढने निकले उनके पति कनकराजू (संजय दत्त) रहस्यमय तरीके से लापता हो जाते हैं। डॉक्टरों का मानना है कि अगर गंगादेवी अपने पति को फिर देख लें, तो उनकी सेहत में सुधार हो सकता है। इसी उम्मीद में राजू हैदराबाद पहुंचता है, जहां उसकी यह तलाश उसे अपने परिवार के काले रहस्यों, अधूरे सच और डरावने अतीत से रू-ब-रू कराती है। अनीता (रिद्धि कुमार) और भैरवी (मालविका मोहनन) उसकी इस यात्रा में भावनात्मक गहराई जोड़ती हैं। कहानी वर्तमान और अतीत, अच्छाई और ब...









