बलूचिस्तान में बढ़ते संकट से CPEC पर दबाव, चीन की बढ़ीं मुश्किलें; भारत के लिए क्या हैं रणनीतिक संकेत?
नई दिल्ली/इस्लामाबाद। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में लगातार बिगड़ते सुरक्षा हालात चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के लिए नई चुनौती बनते जा रहे हैं। अलगाववादी हिंसा, चीनी परियोजनाओं पर हमले और सुरक्षा संबंधी चिंताओं ने चीन के अरबों डॉलर के निवेश पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर बलूचिस्तान की कथित "स्वतंत्रता घोषणा" भी चर्चा का विषय बनी, हालांकि उसे किसी देश या अंतरराष्ट्रीय संस्था की मान्यता नहीं मिली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात का असर केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरण और चीन की दीर्घकालिक निवेश योजनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
वायरल 'स्वतंत्रता घोषणा' पर क्या है स्थिति?
जुलाई 2026 में सोशल मीडिया पर एक कथित घोषणा सामने आई, जिसमें "रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान" के गठन का दावा किया गया। इसमें अलग झंडा, मुद्रा और प्रश...








