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पीकेएल-12 : दबंग दिल्ली को मिली सीजन की दूसरी हार, बंगाल ने 1 अंक से हराया

पीकेएल-12 : दबंग दिल्ली को मिली सीजन की दूसरी हार, बंगाल ने 1 अंक से हराया

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चेन्नई, 9 अक्टूबर । जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में गुरुवार खेले गए प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) के 12वें सीजन के 73वें मैच में बंगाल वारियर्स ने दबंग दिल्ली केसी को 37-36 से हरा दिया। मैच का फैसला अंतिम सेकेंड में हुआ। यह 13 मैचों में दिल्ली की दूसरी हार है जबकि बंगाल को 11 मैचों में चौथी जीत मिली है। बंगाल की जीत में देवांक दलाल (12) ने एक बार फिर अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा हिमांशु (6) ने उनका अच्छा साथ दिया। डिफेंस में आशीष ने हाई-5 लगाया जबकि मंजीत ने चार अंक लिए। आशू मलिक के बगैर खेल रही दिल्ली के लिए दिल्ली के लिए नीरज ने छह जबकि अजिंक्य ने पांच अंक लिए। बंगाल ने 2-0 की लीड के साथ अच्छी शुरुआत की लेकिन नवीन ने दो अंक लेकर स्कोर बराबर कर दिया। इसके बाद पांच मिनट के खेल में बंगाल ने फिर से 4-3 की लीड ले ली औऱ फिर देवांक ने फजल और सुरजीत को बाहर कर लीड दोगुनी कर दी। दिल्ली ने हालांकि वा...
आपातकाल के 50 वर्ष : यह अराजकता और तानाशाही का काला दौर था

आपातकाल के 50 वर्ष : यह अराजकता और तानाशाही का काला दौर था

लेख
यह इंदिरा की सबसे बड़ी गलती थी, सत्ता पर काबिज रहने के लिए की थी लोकतंत्र की हत्या : रामपाल सिंह रामानुज शर्मा नई दिल्ली, 09 अक्टूबर (हि.स.)। आपातकाल को अगर बर्बर, अराजकता और तानाशाही के काले दौर की संज्ञा दी जाये तो यह कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। यह ऐसा वक्त था, जिसमें पुलिस और प्रशासन निरंकुश था। किसी की कोई सुनवाई नहीं थी। ऐसा लगता था कि हम लोकतांत्रिक देश में नहीं, अपितु एक गुलाम देश में रह रहे हों। यह इंदिरा की सबसे बड़ी गलती थी। सत्ता पर काबिज रहने के लिए उन्होंने लोकतंत्र की हत्या की थी। आपातकाल को बर्बर, अराजकता और तानाशाही का काला दौर करार देते हुए अमोद अरोड़ा बताते हैं कि यह ऐसा वक्त था जिसमें पुलिस और प्रशासन निरंकुश था। किसी की कोई सुनवाई नहीं थी। ऐसा लगता था कि हम लोकतांत्रिक देश में नहीं अपितु एक गुलाम देश में रह रहे हों। वे कहते हैं कि आपातकाल का विरोध करने वा...
आपातकाल के 50 वर्ष : उत्पीड़न की ऐसी पीड़ा, 16 महीने तक राजेंद्र अग्रवाल नहीं देख सके सूर्य की रोशनी

आपातकाल के 50 वर्ष : उत्पीड़न की ऐसी पीड़ा, 16 महीने तक राजेंद्र अग्रवाल नहीं देख सके सूर्य की रोशनी

विशेष समाचार
रामानुज शर्मा नई दिल्ली, 09 अक्टूबर । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला प्रचारक रहे राजेंद्र अग्रवाल ऐसे लोकतंत्र रक्षक सेनानी हैं, जिन्हें आपातकाल के दौरान पीलीभीत कारागार की अंधेरी कोठरी में रखा गया। उनके साथ हुए उत्पीड़न का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें 16 महीने तक यही नहीं पता चल सका कि दिन है या रात? वह सूर्य की रोशनी देखने के लिए तरस गए थे। लोकतंत्र रक्षक सेनानी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व जिला प्रचारक एवं मेरठ के सांसद रहे राजेंद्र अग्रवाल हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत में आपातकाल को लोकतंत्र पर सबसे बड़ा आघात बताते हैं। वह कहते हैं कि यह कांग्रेस सरकार द्वारा संविधान का बेजा इस्तेमाल करके लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति किया गया कुठाराघात था। यह ऐसा दौर था, जिसमें आम से लेकर खास तक, हर शख्स ने न केवल असहनीय पीड़ा सही, बल्कि उसे नाना प्रकार से उत्पीड़ित किया...
पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी ने संघ को लेकर अपने अनुभव किए साझा

पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी ने संघ को लेकर अपने अनुभव किए साझा

विशेष समाचार
रांची, 9 अक्टूबर । पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने संघ को लेकर अपने अनुभव के बारे में कहा कि हम सब ने बहुत कुछ जाने अनजाने में इस संगठन के कार्य और उसकी संरचना के बारे में सुना है या फिर स्वयं भी किसी न किसी रूप में अनुभव किया है। मेरा भी इस संगठन से जुड़ाव कुछ इसी प्रकार हुआ। उन्होंने बताया कि वे 31 मई 2011 को भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हुए। तब तक उन्होंने संघ के बारे में अखबारों, पत्रिकाओं या फिर कभी किसी राजनीतिक चर्चाओं में सुना था। मैं इस संगठन के उत्कृष्ट कार्यों से अनभिज्ञ रहा। ऐसा भी नहीं कि मैंने अपने सेना के सेवाकाल में इस संगठन के कार्यों का अनुभव नहीं किया, लेकिन कभी ध्यान ही नहीं दिया। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें इस संगठन के कुछ कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर मिला। इसमे...
नारी शक्ति का सवश्रेष्ठ उदहारण है करवा चौथ

नारी शक्ति का सवश्रेष्ठ उदहारण है करवा चौथ

लाइफस्टाइल
करवा चौथ (10 अक्टूबर) पर विशेष रमेश सर्राफ धमोरा करवा चौथ विवाहित महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण त्योहार है। सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक पत्नियाँ अपने पति की सलामती के लिए व्रत रखती हैं। पूरे दिन बिना पानी पिए और कुछ भी खाए व्रत रखना आसान नहीं है, लेकिन स्नेही पत्नियाँ अपने पति के प्रति पूरे प्रेम और सम्मान के साथ ये सभी रस्में निभाती हैं। यह त्याेहार हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। करवा चौथ का व्रत हर साल महिलाओं द्वारा अपने पतियों के लिए किया जाता है और यह न केवल त्याेहार है बल्कि यह पति-पत्नी के पवित्र रिश्तों का पर्व है। कहने को तो करवा चौथ का त्याेहार एक व्रत है लेकिन यह नारी शक्ति और उसकी क्षमताओं का सवश्रेष्ठ उदहारण है। क्योंकि नारी अपने दृढ़ संकल्प से यमराज से भी अपने पति के प्राण ले आती हैं तो फिर वह क्या नहीं कर सकती हैं। आज के नये जमाने में...
सीजेआई गवई और राकेश किशोर मामला कहां जाकर थमेगा

सीजेआई गवई और राकेश किशोर मामला कहां जाकर थमेगा

लेख
-डॉ. मयंक चतुर्वेदी भारतीय लोकतंत्र की आत्मा उसके संविधान और न्यायपालिका में बसती है, जहां समानता, स्वतंत्रता और न्याय के आदर्शों को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। वस्‍तुत: सर्वोच्च न्यायालय को इसी आत्मा का रक्षक कहा जाता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह प्रश्न बार-बार उठ रहा है कि क्या यह रक्षक संस्था सभी समुदायों के लिए समान रूप से न्यायसंगत है? जब मुद्दे बहुसंख्यक समाज, हिन्दू परंपराओं या सांस्कृतिक अधिकारों से जुड़े होते हैं, तो न्यायिक रवैया अक्सर असहज और असंतुलित दिखाई देता है। जनहित याचिका : उद्देश्य से औपचारिकता तक भारत में जनहित याचिका (पीआईएल) की शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी ताकि समाज के हाशिये पर खड़े लोगों को भी न्याय का दरवाजा खुला मिले। ‘लोकस स्टैंडी’ की दीवार को तोड़कर सुप्रीम कोर्ट ने आम नागरिकों को न्याय की प्रक्रिया में भागीदार बनाया। किंतु धीरे-धीरे यह औजार राजनीत...
संघ के 100 सालः बूंद-बूंद सागर बना

संघ के 100 सालः बूंद-बूंद सागर बना

लेख
मनोज कुमार मिश्र इस विजयादशमी को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के स्थापना के सौ स्वर्णिम साल पूरे हो गए। सौ साल पहले डाक्टर केशव बलिराम हेडगेवार ने अपने कुछ साथियों के साथ राष्ट्र जागरण के संकल्प के साथ संघ के रूप में एक दीप जलाया था। इन सौ सालों में वह अखंड ज्योति बन कर भारत की आत्मा को आलोकित कर रहा है। उसकी मजबूत उपस्थिति आज समाज के हर क्षेत्र में है। संघ के मौजूदा सरसंघचालक डॉक्टर मोहन भागवत ने कई बार दोहराया है कि संघ में सबकुछ परिवर्तनशील है, सिवाय इस मूल विश्वास के कि भारत हिन्दू राष्ट्र है। संघ हिन्दू समाज को संगठित करने और उसे सामर्थ्यवान बनाने का काम कर रहा है। वह न तो किसी का तुष्टिकरण करता है न ही किसी से भेदभाव। संघ के आसपास बने विभिन्न संगठनों में कांग्रेस तो एक हद तक अपनी मौजूदगी बनाए हुए है लेकिन जिस नेता (महात्मा गांधी) के बूते उसे आजाद भारत की सत्ता मिली, उसके विचारो...
बिहार चुनाव में झामुमो के प्रवेश से उसके राष्ट्रीय पार्टी बनने का मार्ग प्रशस्त होगा

बिहार चुनाव में झामुमो के प्रवेश से उसके राष्ट्रीय पार्टी बनने का मार्ग प्रशस्त होगा

पॉलिटिक्स
रांची, 6 अक्टूबर । बिहार विधानसभा चुनाव-2025 में हार-जीत भले किसी भी राजनीतिक दल की हो, लेकिन झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के लिए यह चुनाव ऐतिहासिक साबित हो सकता है। इस चुनाव में झामुमो के उतरने से उसकी राष्ट्रीय पार्टी बनने की दिशा में पहली औपचारिक शुरुआत हो जाएगी। राजनीति के जानकारों के अनुसार बिहार में विपक्षी गठबंधन के अंदर सीट बंटवारे पर लगभग सहमति बन चुकी है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने अपने कोटे से पहली बार झामुमो और राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) को कुल पांच सीटें देने पर हामी भरी है। इनमें झामुमो को दो सीटें और रालोजपा को तीन सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि झामुमो ने इसपर अबतक हामी नहीं भरी है। झामुमो ने बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सात अक्तूबर को औपचारिक रूप से अपना दावा पेश करने की बात कही है। झामुमो ने बिहार में महागठबंधन के समक्ष...
छत्तीसगढ़ के कोंडागांव में रावण दहन नहीं होता, किया जाता है वध

छत्तीसगढ़ के कोंडागांव में रावण दहन नहीं होता, किया जाता है वध

नवाचार, विशेष समाचार
कोंडागांव, 2 अक्टूबर । छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के भूमका और हिरीं गांवों में विजयादशमी पर रावण दहन नहीं होता बल्कि एक अनूठी परंपरा निभाई जाती है। दशहरे पर जहां देशभर में रावण के पुतले जलाए जाते हैं, वहीं इन गांवों में मिट्टी का विशाल रावण के पुतले का दहन नहीं करते बल्कि मिट्टी से बने रावण का तोड़कर उसका वध करते हैं। इस सदियों पुरानी परंपरा में रावण की नाभि से 'अमृत' निकालने का विधान है। गांव के लोग मिट्टी का रावण बनाते हैं। रामलीला के मंचन के बाद रावण वध किया जाता है। इस दौरान रावण की नाभि से एक तरल पदार्थ, जिसे ग्रामीण 'अमृत' मानते हैं, निकाला जाता है। ग्रामीण इसे अपने माथे पर तिलक लगाकर स्वयं को पवित्र मानते हैं। उनके मुताबिक, यह तिलक शुभ फल देने वाला और समृद्धि का प्रतीक है। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। यह परंपरा कोंडागांव के दशहरे को एक विशेष पहचान देती है। स्थानीय ग्रामीण ...
शिक्षा को अपनाकर विकास की राह में समाज को आगे बढ़ना होगा – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

शिक्षा को अपनाकर विकास की राह में समाज को आगे बढ़ना होगा – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

राज्य
कोरबा, 9 अक्टूबर । मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज कटघोरा में भूमिपूजन कार्यों तथा समारोह में शामिल हुए । इन कार्यों में सातगढ़ कँवर समाज के सामाजिक सम्मेलन-1857 के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीर बलिदानी सीताराम कँवर के पुण्य तिथि समारोह सहित रामपुर चौक में शहीद सीताराम कँवर के प्रतिमा अनावरण तथा ग्राम कसनिया मोड़ में भगवान सहस्त्रबाहु के नाम पर चौक का नामकरण, मूर्ति स्थापना और प्रवेश द्वार सह उद्यान निर्माण के भूमिपूजन कार्यक्रम शामिल हैं । इस दौरान उन्होंने कटघोरा में हाईटेक बस स्टैंड और कँवर समाज के लिए भवन हेतु एक करोड़, भगवान सहस्त्रबाहु के मूर्ति स्थापना एवं प्रवेश द्वार निर्माण के लिए 25 लाख, शहीद सीताराम कँवर के प्रतिमा के लिए 10 लाख की घोषणा की। कँवर समाज के सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसी भी समाज के लोगों का आगे बढने का शिक्षा ही एकमात्र रास्ता है...