
बाजार के आंकड़ों को देखें, तो पिछले कुछ दिन से जारी इस गिरावट के कारण आईटी इंडेक्स में शामिल 10 शेयरों में से 9 शेयर भी बियर मार्केट जोन में पहुंच गए हैं। इनमें सबसे अधिक नुकसान एलटी माइंडट्री के शेयर को हुआ है। इसके भाव में लगभग 34 प्रतिशत की गिरावट आ गई है। इसी तरह टीसीएस और इन्फोसिस जैसी बड़ी ब्लूचिप कंपनियों के शेयर के भाव में भी 24 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है।
आईटी इंडेक्स में शामिल 10 शेयरों में से सिर्फ विप्रो का शेयर बियर मार्केट जोन में जाने से बचा हुआ है। विप्रो का शेयर अपने सर्वोच्च स्तर से 17 प्रतिशत टूट चुका है। आधिकारिक तौर पर किसी भी शेयर में 20 प्रतिशत की गिरावट के बाद ही बियर मार्केट जोन की शुरुआत मानी जाती है। यही कारण है कि विप्रो के शेयर 17 प्रतिशत की गिरावट के बावजूद अभी तक बियर मार्केट जोन में जाने से बचे हुए हैं।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी के कारण बाजार में बनी अनिश्चितता और अमेरिका में मंदी आने की आशंका की वजह से भारतीय आईटी कंपनियां दबाव में आ गई हैं। घरेलू आईटी कंपनियां की आय का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा अमेरिकी बाजार से ही आता है। ऐसे में अगर अमेरिकी टैरिफ पॉलिसी का असर आईटी सेक्टर पर भी पड़ा, तो भारतीय कंपनियां कि आय काफी हद तक प्रभावित हो सकती है। धामी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत धामी का कहना है कि अमेरिका में मंदी और टैरिफ वॉर की आशंका ने ग्लोबल बाजार को काफी हद तक प्रभावित किया है। इसकी वजह से पिछले एक महीने में नैस्डेक में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर भारतीय आईटी कंपनियों पर भी पड़ा है।