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डेंगू के डंक की जद में दुनिया की आधी आबादी

डेंगू के डंक की जद में दुनिया की आधी आबादी

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- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा देश-दुनिया में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस साल के देश के आंकड़ों की ही बात करें तो डेंगू से मरने वालों की संख्या लगभग 100 के आंकड़े को छू रही है। अकेले केरल में डेंगू के कारण 38 लोगों की मौत की सूचना है। डेंगू की गंभीरता को देखते हुए केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने दो दिन पहले उच्चस्तरीय बैठक कर आवश्यक निर्देश दिए हैं। दरअसल हमारे देश में डेंगू का पीक सीजन जुलाई से अक्टूबर तक रहता है। वैसे, डेंगू अब किसी देेश की सीमा में बंधा नहीं है और दुनिया के 129 देशों या यों कहें कि दुनिया की आधी आबादी के क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है। देश-दुनिया की सरकारों और विश्व स्वास्थ्य संगठन के सामने डेंगू बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। यदि विश्व स्वास्थ्य संगठन की हालिया रिपोर्ट अतिश्योक्तिपूर्ण मानें तब भी इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि डेंगू आज और ...
तारिक फतेह क्यों चुभते थे कठमुल्लों को

तारिक फतेह क्यों चुभते थे कठमुल्लों को

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- आरके सिन्हा तारिक फतेह को उनके चाहने वाले एक बेखौफ लेखक के रूप में याद रखेंगे। वे सच का साथ देते रहे। वे भारत के परम मित्र थे। उन्हें इस बात का गर्व रहा कि उनके पूर्वज हिंदू राजपूत थे। वे बार-बार कहते और लिखते थे कि भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के तमाम मुसलमानों के पुरखे हिंदू ही थे और उन्हें जबरदस्ती मुसलमान बनाया गय । उनकी इस तरह की साफगोई कठमुल्लों को नागवार गुजरती थी। तारिक फतेह हिंदी पट्टी के मुसलमानों के दिल में चुभते हैं। उनकी तारीफ यह थी कि वह डंके की चोट पर अपने पूर्वजों को हिंदू बताते रहे। बहुत कम मुसलमान यह हिम्मत दिखा पाते हैं। वह मुस्लिम सांप्रदायिकता पर लगातार चोट करते रहे। तारिक फतेह पहली बार 2013 में भारत दौरे पर आए थे। तब उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था- 'पाकिस्तान को तो अब भूल जाइए। इसको एक न एक दिन कई टुकड़ों में टूटना ही है। वो दिन भी दूर नहीं जब बलूचिस्तान और सिंध ...