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राष्ट्रीय हित का कदम है एक साथ चुनाव

राष्ट्रीय हित का कदम है एक साथ चुनाव

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- सुरेश हिन्दुस्थानी वर्तमान में भारत में ऐसे कई कारण हैं, जो राष्ट्रीय विकास में बाधक बन रहे हैं। इसमें एक अति प्रमुख कारण बार-बार चुनाव होना है। देश में होने वाले चुनाव के दौरान लगने वाली आचार संहिता के चलते सरकार का कामकाज भी प्रभावित होता है। हमारे देश में किसी न किसी राज्य में हर वर्ष चुनाव के प्रक्रिया चलती रहती है। चुनाव के दौरान संबंधित सरकार कोई बड़ा निर्णय नहीं ले सकती। चुनाव होने के कारण राजनीतिक दल हर साल केवल चुनाव जीतने की योजना ही बनाते रहते हैं। इस कारण देश के उत्थान के बारे में योजना बनाने या सोचने का उतना समय भी नहीं मिल पाता, जितना सरकार का कार्यकाल होता है। इसलिए वर्तमान में जिस प्रकार से एक साथ चुनाव कराने की योजना पर मंथन चल रहा है, वह देश को उत्थान के मार्ग पर ले जाने का एक अभूतपूर्व कदम है। अभी केंद्र सरकार ने देश में एक साथ चुनाव कराने के बारे में प्राथमिक कदम उठा...
चंद्रयान -3: भारत की एक और छलांग

चंद्रयान -3: भारत की एक और छलांग

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- सुरेश हिन्दुस्थानी आज याद आ रही है, उस भारत देश की जो वैश्विक नेतृत्व का अधिकारी रहा। एक बार पुनः भारत ने उसी दिशा की ओर अपने कदम बढ़ाए हैं, जो विश्व का मार्गदर्शन करने की क्षमता रखता है। आज समूचे विश्व ने उस भारत का साक्षात्कार किया है, जो जगत की समस्त शक्तियों का भंडार है। भारत में अवधारणाएं प्रचलित हैं, वह मिथक नहीं, वास्तविक हैं, लेकिन भारत अपनी शक्ति को विस्मृत कर चुका था, उस हनुमान की तरह जो महा बलशाली होने के बाद भी अपनी शक्ति का अहसास नहीं था। आज देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत की सोई हुई शक्ति को जगाने का कार्य करते दिखाई दे रहे हैं। बेशक वे भाजपा के नेता हैं, लेकिन हमें ऐसी दृष्टि विकसित करनी होगी, जो भारत के हित में है। यानी वह भारत का नेतृत्व कर रहे। वे देश के 140 करोड़ जनता के लोकतांत्रिक मुखिया हैं। जब हम यह दृष्टि विकसित करेंगे तो स्वाभाविक रूप से हमें नरेन्द्र मोद...

संघर्ष की सीढ़ी से सफलता के सोपान तक नरेन्द्र मोदी

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- आलोक मेहता विश्व पटल पर भारत के सबसे चर्चित प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी 17 सितम्बर को 72 के हो गए। उनके जन्मदिन पर देश-दुनिया में ढेरों आयोजन हुए और उनके व्यक्तित्व की विराटता का वर्णन किया गया। वे जिस पार्टी से आते हैं उसके कार्यकर्ता अगले पूरे पखवाड़े को सेवा के लिए समर्पित कर रहे। नरेन्द्र भाई मोदी के प्रधानमंत्री पद और राजनीतिक सफलताओं के विश्लेषण से अधिक महत्ता उनकी संघर्ष यात्रा और हर पड़ाव पर विजय की चर्चा करना मुझे श्रेयस्कर लगता है। राजधानी में संभवतः ऐसे बहुत कम पत्रकार इस समय होंगे, जो 1972 से 1976 के दौरान गुजरात में संवाददाता के रूप में रहकर आए हों। इसलिए मैं अपनी बात और नरेन्द्र भाई मोदी के व्यक्तित्व का विश्लेषण उसी दौर से शुरू करना चाहता हूँ। उन दिनों में देश की एकमात्र बहुभाषी न्यूज एजेंसी हिन्दुस्थान समाचार के लिए कार्य कर रहा था। संवाददाता के रूप में मुझे 1973-76 क...