Saturday, April 5"खबर जो असर करे"

Tag: self-respect

लाला लाजपतराय: स्वत्व स्वाभिमान और राष्ट्र के लिए जीवन समर्पित

लाला लाजपतराय: स्वत्व स्वाभिमान और राष्ट्र के लिए जीवन समर्पित

अवर्गीकृत
- रमेश शर्मा स्वाधीनता संघर्ष केवल राजनैतिक या सत्ता के लिये ही नहीं होता। वह स्वत्व, स्वाभिमान, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और मानसिक अस्मिता के लिये भी होता है। इस सिद्धांत के लिये अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले थे पंजाब केसरी लाला लाजपतराय। उनका जन्म 28 जनवरी 1865 को फिरोजपुर में हुआ था। उनका परिवार आर्यसमाज से जुड़ा था। अपने क्षेत्र के सुप्रसिद्ध व्यवसायी उनके पिता मुंशी राधा कृष्ण आजाद संस्कृत के विद्वान थे, उन्हें फारसी और उर्दू का भी ज्ञान था। माता गुलाब देवी भी विदुषी थीं। सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति समर्पण के संस्कार लाला लाजपतराय को बचपन से मिले थे। आर्य समाज से संबंधित होने के कारण वे अपनी बात को तथ्य और तर्क के साथ रखना उनके स्वभाव में आ गया था। घर में आध्यात्मिक और धार्मिक पुस्तकों का मानों भंडार था। इनके अध्ययन के साथ उन्होंने वकालत की परीक्षा उत्तीर्ण की और रोहतक तथा...
देश के स्वाभिमान की पुनर्स्थापना है श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा

देश के स्वाभिमान की पुनर्स्थापना है श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा

अवर्गीकृत
- डॉ. मोहन यादव आज सौभाग्य का पावन अवसर है। सैकड़ों वर्षों बाद यह शुभ घड़ी आई है...अयोध्या में अपने जन्मस्थान पर रामलला विराजमान हो रहे हैं। पूरे संसार के सनातनी हर्षित, आनंदित और प्रफुल्लित हैं। समूचे विश्व में जयश्रीराम गुंजायमान है। हम सभीसौभाग्यशाली हैं कि हमें यह सुखद दृश्यदेखने का अवसर मिला है।श्रीरामजी की गरिमा के अनुरूप मंदिर निर्माण के लिये पीढ़ियों ने पांच सौ वर्ष तक संघर्ष किया इसमें अनगिनत बलिदान हुए। राम मंदिर हमारी संस्कृति, हमारी आस्था, राष्ट्रीयत्व और सामूहिक शक्ति का प्रतीक है। यह सनातन समाज के संकल्प, संघर्ष और जिजीविषा का ही परिणाम है कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में श्रीराम मंदिर निर्माण का सपना साकार हो रहा है। यह उमंग और उत्सव का अवसर है,समूचा समाजउल्लास के साथ खुशियां मना रहा है। राजा राम प्रत्येक भारतीय और विश्व में व्याप्त सनातनियों के आदर्श...
अमृतकाल में शान से फहराएं तिरंगा

अमृतकाल में शान से फहराएं तिरंगा

अवर्गीकृत
- प्रभुनाथ शुक्ल राष्ट्रीय ध्वज हमारे गौरव और स्वाभिमान का प्रतीक है। दुनिया का कोई भी देश अपने राष्ट्रीय ध्वज को जान से भी अधिक सम्मान देता है। राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान के लिए लाखों लोग बलिदान हो चुके हैं। भारत में राष्ट्रीय ध्वज विशेष अवसरों पर फहराया जाता है। बचपन में जब हम स्कूली शिक्षा ग्रहण कर रहे थे उस दौरान स्वाधीनता और गणतंत्र दिवस पर प्रभातफेरी निकाली जाती थी। उस दौरान स्कूली बच्चे हाथों में तिरंगा लेकर यह गीत गाया करते थे ‘विजयी विश्व तिरंगा, प्यारा झंडा ऊंचा रहे हमारा’। राष्ट्रीय ध्वज की परिकल्पना सबसे पहले पिंगली वेंकैया ने की थी। यह आजादी का अमृतकाल है। देश के हर व्यक्ति को गौरव के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराना चाहिए। ऐसा करने अपने भीतर अपना देश, अपनी माटी की अकल्पनीय अनुभूति होती है और राष्ट्रीय भावना और मजबूत होती है। हमारा राष्ट्रीय ध्वज तीन रंगों से बना है। सबसे ऊपर केसरिया...
लाड़ली बहना योजना जीवन बदलने का अभियान: शिवराज

लाड़ली बहना योजना जीवन बदलने का अभियान: शिवराज

देश, मध्य प्रदेश
- मुख्यमंत्री ने 138 करोड़ से ज्यादा के विकास कार्यों के किये भूमि-पूजन/लोकार्पण भोपाल (Bhopal)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Chief Minister Shivraj Singh Chouhan) ने कहा कि प्रदेश में शुरू की गई मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना (Chief Minister Ladli Behna Yojana) केवल योजना ही नहीं, बल्कि बहनों का जीवन बदलने का अभियान (Sister's life changing campaign) है। इस योजना ने महिलाओं को धनराशि दिलाने के साथ मन में विश्वास और आत्म-सम्मान भी बढ़ाया है। बेटी के बगैर जीवन-चक्र नहीं चल सकता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए बालिका और महिला केन्द्रित महत्वाकांक्षी योजनाएँ मध्यप्रदेश सरकार ने शुरू की है। प्रदेश में इस योजना का लाभ एक करोड़ 25 लाख बहनों को मिल रहा है, जिनके बैंक खाते में प्रतिमाह की 10 तारीख को 1000 रुपये की राशि जमा कराई जा रही है। योजना के दूसरे चरण में 21 से 23 साल की बहनों का पंजीयन किया...
स्वत्व और स्वाभिमान से स्वयं को प्रकाशित होने का संदेश है गुरु पूर्णिमा

स्वत्व और स्वाभिमान से स्वयं को प्रकाशित होने का संदेश है गुरु पूर्णिमा

अवर्गीकृत
- रमेश शर्मा गुरु पूर्णिमा अर्थात अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर यात्रा और व्यक्ति से लेकर राष्ट्र तक स्वाभिमान जाग्रत कराने वाले परम प्रेरक के लिए नमन दिवस। जो हमें अपने आत्मबोध, आत्मज्ञान और आत्म गौरव का भान कराकर हमारी क्षमता के अनुरूप जीवन यात्रा का मार्गदर्शन करें, वे गुरु हैं। वे मनुष्य भी हो सकते हैं, और कोई प्रतीक भी। संसार में कोई अन्य प्राणी भी, ज्ञान दर्शन कराने वाला कोई दृश्य, कोई घटना, कोई ग्रंथ या ध्वज जैसा भी कोई प्रतीक हो सकता है। अपने ज्ञान दाता के प्रति आभार और उनके द्वारा दिए गए ज्ञान से स्वयं के साक्षात्कार करने की तिथि है गुरु पूर्णिमा । आषाढ़ माह की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाने का भी एक रहस्य है। भारत में प्रत्येक तीज त्योहार के लिए तिथि का निर्धारण साधारण नहीं होता, प्रत्येक तिथि का अपना संदेश होता है। गुरु पूर्णिमा की तिथि का भी एक संदेश ह...

फहराएं ‘तिरंगा’ तो यह रखें ख्याल

अवर्गीकृत
- प्रभुनाथ शुक्ल राष्ट्रीय ध्वज हमारे गौरव और स्वाभिमान का प्रतीक है। दुनिया का कोई भी देश अपने राष्ट्रीय ध्वज को जान से भी अधिक सम्मान देता है। राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान के लिए लाखों लोग बलिदान हो चुके हैं। भारत में राष्ट्रीय ध्वज विशेष अवसरों पर फहराया जाता है। बचपन में जब हम स्कूली शिक्षा ग्रहण कर रहे थे उस दौरान स्वाधीनता और गणतंत्र दिवस पर प्रभातफेरी निकाली जाती थी। उस दौरान स्कूली बच्चे हाथों में तिरंगा लेकर यह गीत गाया करते थे 'विजयी विश्व तिरंगा, प्यारा झंडा ऊंचा रहे हमारा'। राष्ट्रीय ध्वज की परिकल्पना सबसे पहले पिंगली वेंकैया ने की थी। तीन रंगों का मतलबः हमारा राष्ट्रीय ध्वज तीन रंगों से बना है। सबसे ऊपर केसरिया रंग की पट्टी हमारी ताकत को दर्शाती है। सफेद रंग की पट्टी शांति और सत्य का प्रतीक है। सबसे नीचे हरे रंग की पट्टी विकास, उर्वरता और समृद्धि का द्योतक है। सफेद रंग की पट्ट...