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Tag: Lok Sabha election

इंडी गठबंधन : यह जीत नहीं हार है

इंडी गठबंधन : यह जीत नहीं हार है

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- सुरेश हिंदुस्तानी देश में हुए लोकसभा चुनाव के परिणाम आ चुके हैं। ये चुनाव परिणाम कई मायनों में महत्वपूर्ण सन्देश देने वाले कहे जा सकते हैं। इसमें पहली बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी ने चार सौ पार का नारा दिया, उसने एक बार फिर से इंडिया शाइनिंग वाले 2004 के चुनाव की याद याद दिला दी। यह संतोष की बात कही जा सकती है कि राजग को सरकार बनाने लायक बहुमत प्राप्त हो गया है। इस चुनाव परिणाम को भाजपा के लिए एक बड़े सबक के रूप में देखा जा रहा है, जबकि अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के लिए पिछले दस वर्षों से संघर्ष करने वाले विपक्ष को कायाकल्प करने वाली संजीवनी मिलने के रूप में देखा जा रहा है। बावजूद इसके चुनाव नतीजों को इंडी गठबंधन के लिए हार ही कहा जाएगा। भाजपा वाले गठबंधन ने भले ही बहुमत का आंकड़ा प्राप्त कर लिया है लेकिन खुद भाजपा के नेता इसे जीत के रूप में प्रचारित करने का साहस नहीं जुटा पा...
सत्ता की चाबी युवाओं के हाथ

सत्ता की चाबी युवाओं के हाथ

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- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के लोकसभा चुनाव में अब लगभग साफ हो गया है कि सत्ता की चाबी युवा मतदाताओं के हाथ में ही रहने वाली है। यह बात राजनीतिक दलों को भी समझ में आ गई है। यही कारण है कि सभी प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा युवाओं को रिझाने के हरसंभव प्रयास किये जा रहे हैं। दरअसल युवा मतदाताओं की मुखरता ही चुनाव परिणामों में परिलक्षित होती है। साफ है कि लोकसभा के पिछले दो चुनावों में युवा मतदाताओं का रुझान नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के प्रति रहा है। हालांकि मजे की बात यह है कि जिन प्रदेशों में क्षेत्रीय दलों की सरकार रही हैं उन प्रदेशों के युवाओं ने क्षेत्रीय पार्टी को अधिक तरजीह दी है। इससे यह तो नहीं कहा जा सकता कि युवा केवल भाजपा के साथ ही है अपितु युवाओं का रुझान नेशनल और स्टेट पॉलिटिक्स को लेकर अलग-अलग देखा जाता रहा है। हालांकि यह भी इंट्रेस्टिं...
चुनावी भंवर में फंसी कांग्रेस

चुनावी भंवर में फंसी कांग्रेस

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- डॉ. अनिल कुमार निगम लोकसभा चुनाव का आगाज होने से पहले 14 जनवरी से कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी न्याय यात्रा शुरू करने वाले हैं। उनकी 67 दिन की यह प्रस्तावित यात्रा 67 जिलों और 14 राज्यों से गुजरेगी। राहुल की यह न्याय यात्रा निसंदेह चुनावी माहौल को कांग्रेस के लिए अनुकूल बनाने के लिए होगी, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस बिना सशक्त विचारधारा, स्पष्ट नीतियों और सशक्त नेतृत्व के बिना सत्ताधारी दल भाजपा को लोकसभा चुनाव में चुनौती दे पाएगी? क्या यह सच नहीं है कि लगभग 140 साल पुराना सियासी दल कांग्रेस इस समय लचर नेतृत्व और स्पष्ट विचारधारा के संकट से गुजर रहा है? वर्तमान में सत्ताधारी दल भाजपा काफी मजबूत स्थिति में है। भाजपा का मुकाबला करने के लिए 28 विपक्षी दलों ने मिलकर इंडिया नामक एक एलायंस बनाया है। लेकिन सीटों के बंटवारे और प्रधानमंत्री पद के चेहरे को लेकर जिस त...