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अगर वक्फ बिल में कुछ कमी है तो उसे ठीक करके उसके बाद लाया जाना चाहिएः खरगे

अगर वक्फ बिल में कुछ कमी है तो उसे ठीक करके उसके बाद लाया जाना चाहिएः खरगे

देश, राजनीति
नई दिल्ली। राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने वक्फ (संशोधन) विधेयक-2025 पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि पूरे देश में एक ऐसा माहौल बना है, जिससे ध्वनित होता है कि यह अल्पसंख्यकों को परेशान करने के लिए लाया गया है। लोकसभा में यह बिल जितने कम अंतर से पास हुआ, वह यह प्रदर्शित करता है कि इसमें कुछ खामियां हैं। जिसकी लाठी उसकी भैंस वाला तरीका छोड़ना होगा। यह दान करने का बिल है। यह कोई और तरीके से दान लाने का बिल नहीं है। इसमें अल्पसंख्यकों के हक हकूक का ख्याल रखा जाना चाहिए। सदन में मौजूद गृहमंत्री अमित शाह से उन्होंने अपील की कि अगर बिल में कुछ कमी है तो उसे ठीक किया जाना चाहिए और उसके बाद इसे लाया जाना चाहिए। अल्पसंख्यक विभाग को आपने पिछले पांच साल में 18,274 करोड़ में से 3,574 करोड़ रुपये खर्च नहीं हुए। इससे लगता है कि आप अल्पसंख्यकों का ढंग से ख्याल नहीं रख रहे हैं। अल्पसंख्यकों...
ह्यूम से खरगे तक कांग्रेस का सफर, क्या खोया क्या पाया

ह्यूम से खरगे तक कांग्रेस का सफर, क्या खोया क्या पाया

अवर्गीकृत
- ऋतुपर्ण दवे कभी लगता है कि कांग्रेस लक्ष्य से भटकी हुई है, कभी लगता है कि उम्मीद की किरण बाकी है। लेकिन सच यही है जनादेश वक्त के साथ अच्छे-अच्छों को हैसियत बता देता है। चाहे दल हों या राजनीतिज्ञ। आज कर्नाटक जीत के बाद भले कांग्रेस ऊर्जा से भरी होने का भ्रम पाल रही हो लेकिन इस कड़वे सच को मानना ही होगा कि जनसाधारण की रुचि दिनों दिन दूसरे दलों में ज्यादा दिखने लगी है। इसे कोई क्षेत्रवाद का विस्तार कहे या पूरे देश में बरसों बरस एकछत्र शासन कर चुके ऐसे राष्ट्रीय दल की विडंबना जो बहुत पहले अपने ही बिछाए जाल में खुद फंसती चली गई। कुछ यूं उलझी कि जनमानस के मस्तिष्क में कांग्रेस को लेकर उलझी गुत्थी कब सुलझेगी पता नहीं। ये सवाल बेहद अहम और राजनीतिक पण्डितों को भी समझ नहीं आता होगा कि गुणनफल क्या होगा? देश की राजनीति और मतदाताओं की परिपक्व सोच ने तमाम दावों और रणनीतिकारों को कई बार धूल चटाया। आम...