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हिन्दी पत्रकारिता दिवसः लोगों का भरोसा जिंदा है

हिन्दी पत्रकारिता दिवसः लोगों का भरोसा जिंदा है

अवर्गीकृत
- योगेश कुमार गोयल भारत-चीन लड़ाई हो या भारत-पाकिस्तान युद्ध या फिर कोरोना से जंग का कठिन दौर, प्रेस ने प्रत्येक ऐसे विकट अवसर पर अपनी महत्ता सिद्ध की है। कहना गलत नहीं होगा कि इसमें हिन्दी पत्रकारिता का स्थान सर्वोपरि है। चाहे हिन्दीभाषी टीवी चैनलों की बात हो या हिन्दी के समाचार पत्र और पत्रिकाओं की, देश की बहुसंख्य आबादी के साथ उसका विशेष जुड़ाव रहा है। इस दृष्टि से राष्ट्र की एकता, अखण्डता एवं विकास की दिशा में हिन्दी पत्रकारिता की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि हिन्दी पत्रकारिता के 197 वर्ष के इतिहास में समय के साथ पत्रकारिता के मायने और उद्देश्य बदलते रहे हैं। बावजूद इसके सुखद स्थिति यह है कि हिन्दी पत्रकारिता के पाठकों या दर्शकों की रुचि में कोई कमी नहीं आई। यह अलग बात है कि अंग्रेजी मीडिया और कुछ अंग्रेजीदां पत्रकारों ने सदैव उसकी प्रामाणिकता एवं विश्वसनीयता पर सवाल...