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लचीली शिक्षा प्रणाली का होना अत्यंत आवश्यक और चुनौतीपूर्ण : राष्ट्रपति

लचीली शिक्षा प्रणाली का होना अत्यंत आवश्यक और चुनौतीपूर्ण : राष्ट्रपति

देश
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु (President Draupadi Murmu) ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में दो दिवसीय विजिटर्स कॉन्फ्रेंस (Visitors Conference) के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थियों की विशेष प्रतिभा और आवश्यकताओं के अनुरूप व्यवस्था आधारित और लचीली शिक्षा प्रणाली (Resilient Education System) का होना अत्यंत आवश्यक और चुनौतीपूर्ण है। राष्ट्रपति ने कहा कि हमारा राष्ट्रीय लक्ष्य इस सदी के पूर्वार्ध के संपन्न होने के पहले ही भारत को एक विकसित देश बनाना है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े सभी लोगों और विद्यार्थियों को वैश्विक सोच के साथ आगे बढ़ना होगा। अंतरराष्ट्रीयकरण के प्रयासों और सहयोग को मजबूत करने से युवा विद्यार्थी 21वीं सदी की दुनिया में अपनी एक अधिक प्रभावी पहचान बना सकेंगे। देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में उत्कृष्ट शिक्षा की उपलब्धता...
जीवन में संतुलन के लिए प्रकृति संरक्षण जरूरी

जीवन में संतुलन के लिए प्रकृति संरक्षण जरूरी

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- योगेश कुमार गोयल विश्वभर में आधुनिकीकरण और औद्योगिकीकरण के चलते प्रकृति के साथ बड़े पैमाने पर खिलवाड़ हो रहा है। प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन और प्रकृति के साथ निर्मम खिलवाड़ का ही नतीजा है कि पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने के कारण मनुष्यों के स्वास्थ्य पर तो प्रतिकूल प्रभाव पड़ ही रहा है, जीव-जंतुओं की अनेक प्रजातियां भी लुप्त हो रही हैं। विश्वभर में मौसम चक्र में निरन्तर आते बदलाव और बिगड़ते पर्यावरणीय संतुलन के कारण पेड़-पौधों की अनेक प्रजातियों के अलावा जीव-जंतुओं की कई प्रजातियों के अस्तित्व पर भी अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता परिषद, ‘इंटरगवर्नमेंटल साइंस-पॉलिसी प्लेटफॉर्म ऑन बायोडायवर्सिटी एंड इकोसिस्टम सर्विसेज’ (आइपीबीईएस) द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में करीब 10 लाख प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा है क्योंकि जैव विविधता और पारिस्थितिकी...

इसलिए जरूरी है एकीकृत चिकित्सा प्रणाली

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- डॉ. विपिन कुमार हाल के दशकों में संपूर्ण विश्व में योग का चलन तेजी से बढ़ा है। यह हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने का महत्वपूर्ण जरिया होने के साथ ही, आध्यात्मिक प्रगति के लिए भी जरूरी है। यह एक ऐसी विधा है, जिससे हमारी नैतिक शक्ति शाश्वत मूल्यों का विकास होता है। जब हम बात योग की कर रहे हों, तो वहां महर्षि पतंजलि का नाम लेना अनिवार्य है। महर्षि पतंजलि को योग का पितामह माना जाता है। उन्होंने न सिर्फ योग के 196 सूत्रों को सहेजा, बल्कि इसे धर्म और अंधविश्वास से बाहर निकालते हुए आम लोगों के लिए भी सहज बनाया। लेकिन समय के बहाव के साथ योग भारतीय जीवन शैली से गायब हो गया। 19वीं और 20वीं सदी के दौरान योग का फिर पदार्पण हुआ। इस कालखंड में योग को बढ़ावा देने में स्वामी विवेकानंद, परमहंस योगानंद, तिरुमलई कृष्णामाचार्य, स्वामी शिवानंद, आचार्य बीकेएस आयंगर जैसे महर्षियों का महत्वपूर्ण...