Saturday, April 5"खबर जो असर करे"

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अभियंता दिवस विशेष: इंजीनियर देश के विकास की धुरी

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- योगेश कुमार गोयल इंजीनियरिंग अब विस्तृत क्षेत्र है। देशभर के महत्वपूर्ण विषयों में इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी कराई जाती है। भारत में प्रतिवर्ष 15 सितंबर को अभियंता दिवस मनाया जाता है। इसका प्रमुख उद्देश्य देश के विद्यार्थियों को इस क्षेत्र में आने के लिए प्रेरित करना है। भारत आज इंजीनियरिंग तथा आईटी के क्षेत्र में दुनिया का अग्रणी देश है। सही मायनों में देश के विकास के धुरी इंजीनियर हैं। दरअसल आपदा प्रबंधन से लेकर निर्माण तक कोई भी कार्य इंजीनियरों के बिना सम्पन्न नहीं हो सकता। आजादी के बाद प्रतिभावान इंजीनियरों ने नए भारत के निर्माण तथा विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इंजीनियरिंग के बारे में अमेरिका के जाने-माने इंजीनियर हेनरी पेट्रोस्की ने कहा था कि विज्ञान का अर्थ है जानना जबकि इंजीनियरिंग का अर्थ है करना अथवा करके दिखाना। भारत के महान अभियंता और भारत रत्न मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया ...

देश की धड़कन हिंदी

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- रमेश सर्राफ धमोरा दुनिया में भारत सबसे ज्यादा विविध संस्कृतियों वाला देश है। धर्म, परंपराओं और भाषा में इसकी विविधता के बावजूद यहां के लोग एकता में विश्वास रखते हैं। भारत में विभिन्न बोलियां बोली जाती हैं। लेकिन सबसे ज्यादा हिंदीबोली, लिखी व पढ़ी जाती है। इसीलिए हिंदी भारत की सबसे प्रमुख भाषा है। 14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया था कि हिंदी की खड़ी बोली ही भारत की राजभाषा होगी। इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद 1953 से देश में 14 सितम्बर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। हिंदी के ज्यादातर शब्द संस्कृत, अरबी और फारसी भाषा से लिए गए हैं। यह मुख्य रूप से आर्यों और पारसियों की देन है। इस कारण हिंदी अपने आप में एक समर्थ भाषा है। अंग्रेजी में मात्र 10 हजार मूल शब्द हैं। इसके मुकाबले हिंदी के मूल शब्दों की संख्या 2 लाख 50 हजार से भी अधिक है। हिंदी विश्व की एक प्राचीन,स...

देश की होनी चाहिए राष्ट्रभाषा

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- डॉ. सौरभ मालवीय 'हिंदी संस्कृत की बेटियों में सबसे अच्छी और शिरोमणि है।' ये शब्द बहुभाषाविद और आधुनिक भारत में भाषाओं का सर्वेक्षण करने वाले पहले भाषा वैज्ञानिक जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन के हैं। नि:संदेह हिंदी देश के एक बड़े भू-भाग की भाषा है। महात्मा गांधी ने हिंदी को जनमानस की भाषा कहा था। वह कहते थे कि राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूंगा है। भारत में अनेक भाषायें एवं बोलियां हैं। इसलिए यहां यह कहावत बहुत प्रसिद्ध है- कोस-कोस पर पानी बदले, चार कोस पर वाणी। भाषा संवाद का माध्यम है। भारतीय संविधान में भारत की कोई राष्ट्र भाषा नहीं है। यद्यपि केंद्र सरकार ने 22 भाषाओं को आधिकारिक भाषा के रूप में स्थान दिया है। इसमें केंद्र सरकार या राज्य सरकार अपने स्थान के अनुसार किसी भी भाषा का आधिकारिक भाषा के चयन कर सकती है। केंद्र सरकार ने अपने कार्यों के लिए हिंदी तथा रोमन भाषा को आधिकारिक भाषा के रूप म...

दो साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंचा देश का विदेशी मुद्रा भंडार, लगातार पाचवें हफ्ते गिरावट

देश, बिज़नेस
नई दिल्ली। देश के विदेशी मुद्रा भंडार (country's foreign exchange reserves) में लगातार पांचवें हफ्ते गिरावट (fifth week down) आई है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार दो सितंबर को समाप्त हफ्ते में 7.9 अरब डॉलर ($ 7.9 billion down) घटकर 553.11 अरब डॉलर ($553.11 billion) रह गया है। विदेशी मुद्रा भंडार का यह 9 अक्टूबर, 2020 के बाद का न्यूनतम स्तर है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के मुताबिक विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट आने की वजह विदेशी मुद्रा आस्तियों (एफसीए), विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास आरक्षित निधि में कमी है। रिजर्व बैंक के सप्ताहिक आंकड़ों के मुताबिक 2 सितंबर को समाप्त हफ्ते में विदेशी मु्द्रा भंडार 7.9 अरब डॉलर घटकर 553.11 अरब डॉलर रहा है, जबकि 26 अगस्त को समाप्त हफ्ते में यह 3.007 अरब डॉलर घटकर 561.046 अरब डॉलर रहा था। रिजर्व बैंक के साप्ताहिक आ...

कैसे हों देश के मास्टरजी

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- आर.के. सिन्हा शिक्षक दिवस पर सारा देश अपने शिक्षकों की ही चर्चा करेगा। यह साफ है कि बेहतर और समर्पित शिक्षकों के बिना हम राष्ट्र निर्माण सही ढंग से नहीं कर सकते। पर हमारे देश में एक बड़ी समस्या यह सामने आ रही है कि कम से कम स्कूली स्तर पर कोई बहुत मेधावी युवा शिक्षक नहीं बन रहे हैं। आप अपने अड़ोस-पड़ोस के किसी मेधावी लड़के या लड़की को शिक्षक बनता नहीं देखेंगे। ये ऐसा क्यों हो रहा है? इसी पर हमें गंभीरता से विचार करना होगा। हमें अपने मेधावी नौजवानों को भी शिक्षक बनने के लिए प्रेरित करना चाहिए। सच में वर्तमान में तो चिंताजनक स्थिति ही बनी हुई है। जिस भारत के राष्ट्रपिता भी शिक्षक रहे हों वहां के योग्य नौजवान मन से शिक्षक नहीं बन रहे हैं। वास्तव में यह विडंबना ही है। यह तथ्य कम लोगों को पता है कि महात्मा गांधी कुछ समय तक मास्टर जी भी रहे हैं। उनकी पाठशाला राजधानी की वाल्मिकी बस्ती में चलत...

कैट का दीपावली तक देश में त्योहारी बिक्री एक लाख करोड़ रहने का अनुमान

देश, बिज़नेस
-चीनी वस्तुओं के बहिष्कार से चीन को 75 हजार करोड़ का लगेगा झटका नई दिल्ली। पिछले दो साल में कोरोना महामारी (corona pandemic) के कारण दिल्ली सहित देश के व्यापार पर बुरा असर (bad effect on business) पड़ा है। भारी धन संकट तथा बाज़ार में बड़ी उधारी के कारण व्यापारी वर्ग भारी वित्तीय दबाव (business class heavy financial pressure) में है, लेकिन 31 अगस्त से शुरू हुए गणेश उत्सव (Ganesh Utsav) में हो रहे अच्छे व्यापार तथा भारतीय उत्पादों की ख़रीद के कारण व्यापारियों को उम्मीद बंधी हैं। इस वर्ष दीपावली (Diwali) तक देश में त्योहारी बिक्री एक लाख करोड़ रुपये (Festive sale Rs 1 lakh crore) तक हो सकती है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने यह बात कही। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने शुक्रवार को बताया कि 31 अगस्त से एक बार फिर चीनी वस्तुओं का देशव्यापी बहिष्कार अभियान शुरू किया है। ...

देश की 10वीं सबसे अधिक मार्केट वैल्यू वाली कंपनी बनी अडाणी ट्रांसमिशन

देश, बिज़नेस
नई दिल्ली। अडाणी ग्रुप की कंपनियों को इस साल शेयर बाजार में लगातार जबरदस्त सपोर्ट मिला है, जिसकी वजह से ग्रुप की सभी 7 लिस्टेड कंपनियों के नेटवर्थ में जबरदस्त उछाल आया है। इसी उछाल के कारण इस ग्रुप की एक कंपनी अडाणी ट्रांसमिशन देश के कई दिग्गज कॉरपोरेट्स को पीछे छोड़ते हुए मार्केट वैल्यू के लिहाज से देश की 10वीं सबसे बड़ी कंपनी बन गई है। अडाणी ट्रांसमिशन के शेयरों में इस साल अभी तक करीब 125 प्रतिशत की तेजी आ चुकी है। इसके कारण शेयर बाजार में आज का कारोबार खत्म होने के बाद इसका मार्केट केपीटलाइजेशन 4.4 लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच गया है। इसके साथ ही अडाणी ट्रांसमिशन ने देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (एलआईसी) और आईटीसी को भी पीछे छोड़ दिया है। अडाणी ट्रांसमिशन के शेयरों में पिछले 1 महीने के कारोबार के दौर में ही 10 प्रतिशत तक की तेजी आ चुकी है। अगर इस साल क...

देश के आठ बुनियादी उद्योगों का उत्पादन जुलाई में घटकर 4.5 फीसदी पर

देश, बिज़नेस
नई दिल्ली। अर्थव्यवस्था के मोर्चे (Economy fronts) पर सरकार को झटका लगने वाली खबर है। देश के आठ बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर (Growth rate of eight basic industries) यानी उत्पादन जुलाई महीने (Production July month) में धीमा पड़कर 4.5 फीसदी रहा जबकि जून महीने में यह 13.2 फीसदी (June it was 13.2 percent) रहा। बुनियादी उद्योगों की उत्पादन की यह वृद्धि दर पिछले छह महीने में सबसे कम है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने बुधवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के जारी आंकड़ों के मुताबिक आठ बुनियादी उद्योगों का उत्पादन जुलाई महीने में 4.5 फीसदी रहा है। एक साल पहले इसी महीने में आठ बुनियादी उद्योगों का उत्पादन 9.9 फीसदी रहा था। आंकड़ों के मुताबिक बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर जून में 13.2 फीसदी, मई में 19.3 फीसदी, अप्रैल में 9.5 फीसदी, मार्च में 4.8 फीसदी, फरवरी में 5.9...

देश को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी उम्मीद

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- डा. वेदप्रताप वैदिक सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति यू.यू. ललित के प्रधान न्यायाधीश बनते ही दनादन फैसले शुरू कर दिए हैं। यह अपने आप में एक मिसाल है। ऐसा लगता है कि अपने ढाई माह के छोटे से कार्यकाल में वे हमारे सारे न्यायालयों को शायद नए ढांचे में ढाल जाएंगे। इस समय देश की अदालतों में चार करोड़ से ज्यादा मुकदमे लटके हैं। कई मुकदमे लगभग 30-40 साल से विचाराधीन हैं। मुकदमों में फंसे लोगों की परेशानी की कहानी अलग है। न्यायमूर्ति ललित की अदालत ने गुजरात के दंगों की 11 याचिकाओं, बाबरी मस्जिद से संबंधित मुकदमों और बेंगलुरु के ईदगाह मैदान के मामले में जो फैसले दिए हैं, उनसे आप सहमति व्यक्त करें, यह जरूरी नहीं है लेकिन उन्हें दशकों तक लटकाए रखना तो बिल्कुल निरर्थक ही था। जाॅन स्टुअर्ट मिल ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ ‘लिबर्टी’ में पते का वाक्य लिखा है। उन्होंने कहा है- ‘‘देर से दिया गया न्याय तो अन्याय ही...