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ऋषि परंपरा वाहक अभाविप का सत्तरवां सोपान

ऋषि परंपरा वाहक अभाविप का सत्तरवां सोपान

अवर्गीकृत
- प्रवीण गुगनानी यदि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक परिवार है तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का छात्र समूह इस परिवार का युवावर्ग है। इस युवावर्ग के आदर्श स्वामी विवेकानंद हैं। संघ ने अपने परिवार के इस युवा सदस्य को जो सिखाया है, उसका मूल यही है- काक चेष्टा, बको ध्यानं, स्वान निद्रा तथैव च। अल्पहारी, गृहत्यागी, विद्यार्थी पंच लक्षणं॥ (कौवे की तरह जानने की चेष्टा वाला, बगुले की तरह ध्यान लगाने वाले, कुत्ते की तरह जागृत अवस्था में सोने वाला व अल्पाहारी होकर आवश्यकतानुसार खाने वाला और गृह-त्यागी यही विद्यार्थी के पंच लक्षण हैं।) निश्चित ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की विगत उनहत्तर 69 वर्षों की अनथक यात्रा इन पांच लक्षणों के साथ ही हुई है। इतना यश, कीर्ति, पराक्रम, संयम, गौरव, पुण्य, उपलब्धि, वितान, विस्तार, उड़ान, गहनता, बहाव, उठाव, परिपक्वता, अल्हड़ता और सबसे बड़ी बात किसी सुंदर सी...
अभाविप: भारतीयता को समर्पित छात्र आंदोलन का 75वां वर्ष

अभाविप: भारतीयता को समर्पित छात्र आंदोलन का 75वां वर्ष

अवर्गीकृत
- आशुतोष सिंह भारतीयता के उदात्त विचार को समर्पित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की ऐतिहासिक संगठनात्मक यात्रा 09 जुलाई को अपने 75वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। यह यात्रा 1949 में देश की स्वतंत्रता के उपरांत राष्ट्र पुनर्निर्माण तथा समर्थ व सबल युवा पीढ़ी गढ़ने का श्रेष्ठ लक्ष्य लिए आरंभ हुई थी। किसी भी संगठन के लिए 75वें वर्ष तक पहुंचना गौरवशाली, महत्वपूर्ण तथा उत्सव का अवसर होता है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की संगठनात्मक यात्रा में यह अवसर ऐसे समय आया है जब देश की स्वतंत्रता का अमृतकाल चल रहा है। देश की विकास यात्रा के साथ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की यात्रा राष्ट्र समर्पित सक्षम युवा पीढ़ी के निर्माण की रही है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का स्वरूप अपने 75वें वर्ष में विस्तृत तथा बहुआयामी हो गया है। पिछले सत्र में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की कुल सदस्यता 45 लाख से अध...