Sunday, April 6"खबर जो असर करे"

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आत्महत्या किसी समस्या का हल नहीं

आत्महत्या किसी समस्या का हल नहीं

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-योगेश कुमार गोयल दुनियाभर में तेजी से बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए प्रतिवर्ष 10 सितम्बर को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सहयोग से ‘विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस’ मनाया जाता है। इस दिवस की शुरुआत ‘इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन’(आईएएसपी) द्वारा 2003 में की गई थी। इन दिन पीले रंग के रिबन को प्रतीक के रूप में पहना जाता है, जिसका यह संदेश है कि आत्महत्या की रोकथाम के बारे में जन जागरुकता से लोगों की जान बचाई जा सकती है। इस दिवस का उद्देश्य आत्महत्या की मनोवृत्ति पर शोध करना, जागरुकता फैलाना और डेटा एकत्रित करना है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक प्रतिवर्ष दुनियाभर में करीब आठ लाख लोग आत्महत्या के जरिये जीवनलीला खत्म कर डालते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में आत्महत्या के मामले 15 से 29 वर्ष के लोगों में होते हैं। जबकि आत्महत्या का प्रयास करने वालों का आंकड़ा इससे बहुत ज्य...
अंतरराष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम दिवसः जीवन का वरण करें

अंतरराष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम दिवसः जीवन का वरण करें

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- गिरीश्वर मिश्र वैसे तो आत्महत्या जैसी घटनाओं का विभिन्न संस्कृतियों में लम्बा इतिहास है, फिर भी समकालीन समाज में जिस तेज़ी से ये लगातार बढ़ रही है वह पूरे विश्व के लिए चिंता का बड़ा कारण हो रहा है। आत्महत्या की दिशा में आगे बढ़ना और उसे अंजाम देना बड़ा जटिल व्यवहार है। यह आर्थिक, पारिवारिक, धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन में आ रहे तीव्र परिवर्तन के दबावों से जुड़ा हुआ है। भारत के संदर्भ में आधुनिकीकरण, धर्म की जगह सेकुलर दृष्टि को तरजीह और संयुक्त परिवार का नष्ट होना कुछ ऐसी घटनाएँ हैं जो हमारी सोच को उलट-पलट रहे हैं और व्यक्तिगत स्तर पर व्यवहार को नियंत्रित संयोजित करने की प्रक्रिया को कमजोर कर रहे हैं। औद्योगीकरण तथा नगरीकरण आदि ने समाज में विद्यमान एकीकरण या जोड़ने की क्षमता को लगातार कम किया है। अब व्यक्तिगत स्वातंत्र्य को बढ़ावा देते हुए व्यक्ति की निजी इच्छाओं को अधिक महत्व दिया जा रह...
भारतीय शिक्षा परंपरा और शिक्षक

भारतीय शिक्षा परंपरा और शिक्षक

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- हृदयनारायण दीक्षित सर्वोत्तम हमारी सर्वोत्तम मनोकामना है। सर्वोत्तम हमारी गहन अभिलाषा है। यही अभिलाषा भिन्न-भिन्न रूपों में प्रकट होती है। प्रतिस्पर्धा में प्रथम होने की इच्छा। धनसंग्रही होने की अभिलाषा। लोकसंग्रही होने की आकांक्षा और यश अभीप्सा। शिक्षा हमारे उत्तम को उभारती है और सर्वोत्तम में प्रकट करती है। लेबनानी चिन्तक खलील जिब्रान की सुंदर पुस्तक है- ‘प्राफेट’। लिखा है, “शिक्षक ने पूछा कि शिक्षा के विषय में बताओ। उसे बताया गया। कोई व्यक्ति तुम्हारे सामने वही उद्घाटित कर सकता है जो तुम्हारे भीतर हो।” शिक्षा हमारे ही सुप्त ज्ञान प्राप्ति का उपकरण है। ज्ञान के लिए चाहिए गुरू। तुलसीदास ने गाया है-“बिन गुरू होंहि कि ज्ञान”? इसी तरह शिक्षा के लिए शिक्षक की महत्ता है और ज्ञान के लिए गुरू की। शिक्षा का शिखर सर्वोत्तम ज्ञान है। ज्ञान का प्रारम्भिक चरण शिक्षा है। शिक्षक का शिखर विकास गुरूत...
महिलाओं के खिलाफ अपराध और उसके मूल कारणों की पहचान

महिलाओं के खिलाफ अपराध और उसके मूल कारणों की पहचान

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- पंकज जगन्नाथ जयस्वाल कोलकाता में महिला डॉक्टर से बलात्कार और उसकी हत्या की घटना की विभिन्न माध्यमों जरिये से व्यापक रूप से निंदा की गई। जिसमें सामूहिक सभा, मार्च, वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट आदि शामिल हैं। छेड़छाड़ और बलात्कार हमारी माताओं, बहनों और बेटियों के खिलाफ जघन्य अपराध बन गया है। कभी-कभी आवाज़ उठाने से समस्या का समाधान नहीं होगा; हमें पहले अंतर्निहित कारणों को समझना चाहिए और सिस्टम व समाज में आवश्यक समायोजन का प्रयास करना चाहिए। इसके कई कारण हैं लेकिन प्राथमिक कारण शिक्षा प्रणाली है। प्राचीन काल में जब हम गुरुकुल शिक्षा प्रणाली का पालन करते थे, तब कितने बलात्कार के मामले दर्ज किए गए थे? हो सकता है कि कुछ हों, लेकिन वर्तमान में प्रतिघंटे बलात्कार की संख्या बहुत अधिक है। ब्रिटिश शासन के बाद से हम जिस शिक्षा प्रणाली का पालन कर रहे हैं, वह मैकाले द्वारा तैयार की गई एक पश्चिमी शिक्षा...
मोदी सरकार के खिलाफ फर्जी आर्थिक आख्यानों का जवाब

मोदी सरकार के खिलाफ फर्जी आर्थिक आख्यानों का जवाब

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- पंकज जगन्नाथ जयस्वाल आम लोगों में डर पैदा करने के लिए विपक्षी दल, कुछ एनजीओ और वैश्विक बाज़ार की ताकतें प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में सनसनीखेज और झूठे आख्यान फैला रही हैं, जिससे वे सरकार के खिलाफ़ विद्रोह कर सकें और विभिन्न चुनावों के दौरान सबक सिखा सकें। फर्जी आर्थिक आख्यानों में शामिल हैं- मोदी सरकार के भारी-भरकम ऋण भविष्य में अर्थव्यवस्था की गिरावट के लिए ज़िम्मेदार होंगे और भारत जल्द ही आर्थिक रूप से विफल राष्ट्र बन जाएगा। जब नरेन्द्र मोदी ने 2014 में प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाला था, तब भारत की जीडीपी पहले 64 वर्षों के दौरान 1.7 ट्रिलियन डॉलर थी और यह मोदी के नेतृत्व में पिछले दशक में 4 ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ गई है। यह विपक्षी दलों और सरकारों को अस्थिर करने के अन्य लोगों द्वारा झूठे आख्यानों के व्यापक प्रचार को दर्शाता है। प्रधानमंत्री मोदी...
भारतीय ज्ञान परम्परा पर आधारित शिक्षा की जरूरत

भारतीय ज्ञान परम्परा पर आधारित शिक्षा की जरूरत

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- डॉ. सौरभ मालवीय शिक्षा को लेकर समय-समय पर अनेक प्रश्न उठते रहते हैं, जैसे कि शिक्षा पद्धति कैसी होनी चाहिए? पाठ्यक्रम कैसा होना चाहिए? विद्यार्थियों को पढ़ाने का तरीका कैसा होना चाहिए? वास्तव में स्वतंत्रता से पूर्व देश में अंग्रेजी शासन था। अंग्रेजों ने अपनी सुविधा एवं आवश्यकता के अनुसार शिक्षा पद्धति लागू की। उनका उद्देश्य भारतीयों को शिक्षित करना नहीं था, अपितु उनका उद्देश्य केवल अपने लिए क्लर्क तैयार करना था। देश की स्वतंत्रता के पश्चात स्वदेशी सरकार ने इस ओर विशेष ध्यान नहीं दिया। स्वतंत्रता के पश्चात देश में बहुत से कार्य करने थे। संभव है कि इस कारण इस ओर ध्यान नहीं गया हो अथवा उस समय के लोगों को अंग्रेजी शिक्षा पद्धति उचित लगी हो। कारण जो भी रहा हो, देश में अंग्रेजी शिक्षा पद्धति से ही पढ़ाई होती रही। कुछ दशकों पूर्व देश में नई शिक्षा पद्धति की आवश्यकता अनुभव की जाने लगी तथा इस पर ...
वैश्‍विक संकेत : अमेरिकी बादशाहत का अंत निकट तो नहीं

वैश्‍विक संकेत : अमेरिकी बादशाहत का अंत निकट तो नहीं

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- प्रहलाद सबनानी अमेरिका विश्व के लगभग समस्त देशों पर अपनी चौधराहट सफलतापूर्वक लागू करता रहा है। पूरे विश्व में, एक तरह से लगभग समस्त क्षेत्रों में, विभिन्न प्रकार की नीतियों को प्रभावित करने में अमेरिका सफल रहा है एवं इस प्रकार अपनी प्रसारवादी नीतियों को भी लागू करता रहा है। परंतु, हाल ही के वर्षों में अमेरिका की आंतरिक स्थिति, लगभग समस्त क्षेत्रों यथा आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक आदि में लगातार बिगड़ती जा रही है। अमेरिका सहित विकसित देशों की, आर्थिक एवं सामाजिक क्षेत्र में, आंतरिक स्थिति को देखते हुए अब तो पश्चिमी सभ्यता पर ही प्रश्नचिन्ह लगने लगे हैं। अमेरिका सहित अन्य विकसित देशों में आर्थिक विपन्नता एवं परिवार तथा समाज के खंड-खंड होने के बाद पश्चिमी सभ्यता को पतित सभ्यता कहा जाने लगा है और इसे अब अमेरिकी बादशाहत के अंत की शुरुआत भी माना जाने लगा है। अमेरिका में तो राष्ट्रीय ऋण 35 लाख...
पूर्वोत्तर में बढ़ती रेल दुर्घटनाएँ केवल लापरवाही है या आतंकी षड्यंत्र?

पूर्वोत्तर में बढ़ती रेल दुर्घटनाएँ केवल लापरवाही है या आतंकी षड्यंत्र?

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- रमेश शर्मा भारत के पूर्वोत्तर में होने वाली रेल दुर्घटनाओं में अचानक वृद्धि देखी गई। इन दुर्घटनाओं ने यह प्रश्न भी खड़ा किया कि दुर्घटनाओं की यह वृद्धि केवल मेन्टेनेन्स का अभाव है या कोई आतंकवादी षड्यंत्र। जून, जुलाई और अगस्त के तीन माह में बंगाल, झारखंड, उड़ीसा और असम रेलवे परिक्षेत्र में छह बड़ी रेल दुर्घटनाएँ हुईं। और दो होते-होते बचीं। इनमें चार दुर्घटनाओं में रेलगाड़ियाँ पटरी से उतरीं और दो रेलगाड़ियाँ गलत पटरी पर चलीं गईं और दूसरी रेलगाड़ी से टकरा गईं। जो दो रेलगाड़ियाँ दुर्घटना से बच गई, इन दोनों की रेल पटरी पर लकड़ी रखी पाई गई थी। यदि चालक गाड़ी नहीं रोकता तो दुर्घटना अवश्य होती। दोनों में लकड़ी रखे होने का तरीका एक-सा था। यही बात चौंकाने वाली थी। क्या एक ही तरह से दो पटरियों पर लकड़ी का मिलना सामान्य संयोग ही था या किसी षड्यंत्र का हिस्सा? एक ही तरीके से दो रेल पटरियों पर लकड़ी...
नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी का देशविरोधी घोषणा पत्र

नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी का देशविरोधी घोषणा पत्र

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- डॉ.आशीष वशिष्ठ जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने के बाद पहली बार इस केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव कराए जा रहे हैं। विधानसभा चुनाव करीब एक दशक के बाद होने जा रहे हैं। साल 2019 में केंद्र सरकार ने विशेष दर्जा खत्म कर जम्मू-कश्मीर को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था। लद्दाख को भी अलग केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया। जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव तीन चरणों में होंगे। जम्मू-कश्मीर में बीते दो दशकों में इस बार का चुनाव सबसे कम समय में कराया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर में विधानसभा के आखिरी चुनाव साल 2014 में हुए थे। साल 2018 में भाजपा और पीडीपी के गठबंधन वाली सरकार गिर गई थी। उस वक्त आपसी मतभेद के चलते भाजपा ने पीडीपी से अपना समर्थन वापस ले लिया था। सरकार गिरने के बाद जम्मू-कश्मीर करीब छह साल तक केंद्र सरकार के शासन में रहा। जम्मू-कश्मीर चुनाव के मद्देनजर नेशनल कॉन्फ्...