Thursday, April 3"खबर जो असर करे"

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एग्री इंफ्रा फंड से बदल रहा किसानों का जीवन

एग्री इंफ्रा फंड से बदल रहा किसानों का जीवन

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-शिवराज सिंह चौहान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का किसानों के प्रति गहरा प्रेम और संवेदनशीलता, उनके द्वारा लिए गए निर्णय, नीतियों और योजनाओं में स्पष्ट नजर आती है। अन्नदाताओं का जीवन बदलना ही उनका प्रथम लक्ष्य है और संकल्प भी। यही कारण है कि सरकार के तीसरे कार्यकाल के पहले 100 दिनों में कृषि और किसान सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रहे l उनके नेतृत्व में, सरकार किसानों के सशक्तीकरण और कृषि क्षेत्र के उत्थान के लिए अभूतपूर्व प्रयास कर रही है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एआईएफ) जैसी नीतियों में स्पष्ट रूप से झलकता है। भारत में फसल के बाद होने वाला नुकसान बड़ी चुनौती है, जो कृषि क्षेत्र की क्षमता और लाखों किसानों की कड़ी मेहनत को प्रभावित कर रहे हैं। हाल के अनुमानों के अनुसार, भारत में प्रतिवर्ष इसके कुल खाद्य उत्पादन का लगभग 16-18% नष्ट हो जाता है l ये न...
“वन नेशन वन इलेक्शन” आज के भारत की आवश्यकता

“वन नेशन वन इलेक्शन” आज के भारत की आवश्यकता

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- प्रहलाद सबनानी स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत में लोकसभा एवं विभिन्न प्रदेशों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ ही होते रहे हैं। परंतु केंद्र सरकार द्वारा कुछ विधानसभाओं को 1950 एवं 1960 के दशक में इनकी अवधि समाप्त होने के पूर्व ही भंग करने के चलते कुछ विधानसभाओं के चुनाव लोकसभा से अलग कराने की आवश्यकता पड़ी थी, उसके बाद से लोकसभा, विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं एवं स्थानीय स्तर पर नगर निगमों, निकायों एवं पंचायतों के चुनाव अलग-अलग समय पर कराए जाने लगे। आज स्थिति यह हो गई है कि लगभग प्रत्येक सप्ताह अथवा प्रत्येक माह भारत के किसी न किसी भाग में चुनाव हो रहे होते हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान प्रत्येक वर्ष केवल 65 दिन ऐसे रहे हैं जब भारत के किसी स्थान पर चुनाव नहीं हुए हैं। किसी भी देश में चुनाव कराए जाने पर न केवल धन खर्च होता है बल्कि जनबल का उपयोग भी करना पड़ता है...
विकसित भारत के लिए पर्यटन

विकसित भारत के लिए पर्यटन

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- गजेन्द्र सिंह शेखावत एक दशक पहले तक भारतीय पर्यटन को पर्यटन क्षेत्र में अन्य देशों के समकक्ष या उनसे आगे स्थापित करने के लिए भी एक ब्रांड एम्बेसडर की जरूरत सामान्य बात थी। जिस तरह अन्य देश अपने देश के पर्यटन के प्रचार-प्रसार के लिए सुविख्यात फिल्मी सितारों और सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों पर विज्ञापन राशि खर्च कर रहे थे उसी तरह यहाँ भी यह महसूस किया गया कि अतुल्य भारत को एक नया रूप दिए जाने की आवश्यकता है। पिछले एक दशक और पिछले 100 दिनों से भारत के केन्द्रीय पर्यटन मंत्री के रूप में कार्य करते हुए मैंने सभी को यह कहते सुना कि इस देश के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि हमारे बीच एक ऐसे नेता हैं जो न केवल हमारे प्रधानमंत्री हैं बल्कि वे अतुल्य भारत के सबसे बड़े वैश्विक ब्रांड एम्बेसडर और हिमायती हैं। अपनी हर भूमिका में, वे भारत की बेहतरी के लिए काम करते हैं। एक प्रधानमंत्री के रूप में वे निरंत...
‘कौओं’ के बगैर श्राद्ध पक्ष की परंपरा अधूरी

‘कौओं’ के बगैर श्राद्ध पक्ष की परंपरा अधूरी

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- डॉ. रमेश ठाकुर श्राद्ध पक्ष चल रहे हैं। इन दिनों गुजरे लोगों को याद करना और उनका मनपसंद भोजन बनाकर परोसने की परंपरा निभाई जाती है। मान्यताओं के मुताबिक स्वर्गीय तक यह भोजन कौओं द्वारा पहुंचाया जाता है। श्राद्ध में कौए परलोकी लोगों के वाहक बनते हैं। पर, कौए इन्हीं दिनों में दूर-दूर तक दिखाई नहीं पड़ते। श्राद्ध का भोजन लेकर लोग उनके आगमन का लंबा इंतजार करते रहते हैं लेकिन वो नहीं आते। हों तो ही आए न? हैं ही नहीं। जबकि श्राद्ध में भोजन उन्हीं को ध्यान में रख कर तैयार किया जाता है। जाहिर है जब कौए ही नहीं होंगे, तो श्राद्ध की मान्यताएं भला कैसी पूरी होगी? हमेशा से होता आया है कि श्राद्ध में पितरों का भोजन जब तक कौए न खाएं श्राद्ध की मान्यताएं पूरी नहीं होती। कौए आएंगे, खाना चुगेंगे और पितरों तक पहुंचाएंगे, लेकिन कौवे नहीं आते? ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी कहीं-कहीं दिख जाते हैं लेकिन शहरों से...
एकात्म मानव दर्शन- एक दिव्य सिद्धांत

एकात्म मानव दर्शन- एक दिव्य सिद्धांत

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- प्रवीण गुगनानी महान दार्शनिक प्लेटो के शिष्य व सिकंदर के गुरु अरस्तु ने कहा था - "विषमता का सबसे बुरा रूप है विषम चीजों को एक समान बनाने का प्रयत्न करना।" एकात्म मानववाद, विषमता को इससे बहुत आगे के स्तर पर जाकर हमें समझाता है। भारत को एक स्टेट या कंट्री से बढ़कर एक राष्ट्र के रूप में और इसके निवासियों को नागरिक नहीं अपितु परिवार सदस्य के रूप में मानने के विस्तृत दृष्टिकोण का ही अर्थ है एकात्म मानववाद। मानवीयता के उत्कर्ष की स्थापना यदि किसी राजनैतिक सिद्धांत में हो पाई है तो वह है पंडित दीनदयाल जी उपाध्याय का एकात्म मानववाद का सिद्धांत! एकात्म मानववाद को दीनदयालजी सैद्धांतिक स्वरूप में नहीं बल्कि आस्था के स्वरूप में लेते थे, यह कोई राजनैतिक सिद्धांत नहीं अपितु एक आत्मिक भाव है। अपने एकात्म मानववाद के अर्थों को विस्तारित करते हुए ही उन्होंने कहा था कि – “हमारी आत्मा ने अंग्रेजी राज्य के ...
अंत्योदय से समृद्ध होगा भारत

अंत्योदय से समृद्ध होगा भारत

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- डॉ. सौरभ मालवीय देश की समृद्धि के लिए अंत्योदय अत्यंत आवश्यक है। अंत्योदय का अर्थ है- समाज के अंतिम व्यक्ति का उदय। दूसरे शब्दों में- समाज के सबसे निचले स्तर के लोगों का विकास करना ही अंत्योदय है। अंत्योदय के बिना देश उन्नति नहीं कर सकता, क्योंकि जब तक देश के अति निर्धन वर्ग का उत्थान नहीं होता, तब तक वह मुख्यधारा में सम्मिलित नहीं हो सकता। ऐसी स्थिति में देश भी समृद्ध नहीं हो पाएगा। इसलिए अंत्योदय आवश्यक है। जनसंघ के संस्थापक दीनदयाल उपाध्याय ने अंत्योदय का नारा दिया था। अंत्योदय उनका सपना था। वे कहते थे कि आर्थिक योजनाओं तथा आर्थिक प्रगति का माप समाज के ऊपर की सीढ़ी पर पहुंचे हुए व्यक्ति नहीं, बल्कि सबसे नीचे के स्तर पर विद्यमान व्यक्ति से होगा। अंत्योदय के माध्यम से केवल भारत ही नहीं, अपितु समग्र विश्व का विकास हो सकता है। इसके सुनियोजित योजना एवं उत्तरदायित्व आवश्यक है। विश्व के बह...
देश की जरूरत है समान नागरिक संहिता और चुनाव-सुधार

देश की जरूरत है समान नागरिक संहिता और चुनाव-सुधार

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- गिरीश्वर मिश्र ‘गण’ समूह की इकाई का बोधक प्राचीन शब्द है। वह एक ऐसी इकाई जो सुपरिभाषित हो और जिसका परिगणन संभव हो। गण ‘संघ’ का पर्याय है और गणों का समूह भी। देवताओं में विघ्न विनाशक गणेश जी ‘गणपति’ के रूप में विख्यात हैं। अभी-अभी पूरे देश में उनकी वंदना का उत्सव मनाया गया। स्वयं गणपति तो सेकुलर हैं पर सेकुलर राजनीति उनको ग़ैर-सेकुलर मानती है। भारत की संसद ने एक संविधान को अंगीकार किया जो सामाजिक विषमताओं और असमानताओं को दूर करने और नागरिक जीवन के विधिसम्मत संचालन की व्यवस्था करता है। उल्लेखनीय है कि देश की सामाजिक-सांस्कृतिक विविधता और बहुलता उस समय भी मौजूद थी जब संविधान बन रहा था। परंतु उस दौरान सब के बीच देश की एकता मुखर थी और उसके प्रति एकल प्रतिबद्धता थी देश को स्वतंत्रता मिली और ‘स्वराज’ यानी अपने ऊपर अपना राज स्थापित करने का अवसर मिला। स्वराज का भाव जिम्मेदारी भी सौंपता है। हमने...
डिजिटल वॉर से सकते में दुनिया

डिजिटल वॉर से सकते में दुनिया

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-ऋतुपर्ण दवे संचार क्रांति के दौर में चौतरफा और रोजाना नित नई तकनीकों से दुनिया रू-ब-रू हो रही है। मोबाइल, जीपीएस, इण्टरनेट, बिना ड्राइवर की गाड़ियों से लेकर अब कृत्रिम मेधा यानी एआई (आर्टीफीसियल इण्टेलीजेन्स) के युग में 1950 के जमाने में न्यूयॉर्क से निकले पेजर, 74 वर्षों के बाद पहली बार और एक साथ सीरियल ब्लास्ट में तब्दील हो जाएंगे, भला किसने सोचा था? रेडियो फ्रिक्वेंसी पर चलने वाले पेजर का क्रेज अब न के बराबर है। लेकिन किसी पकड़ या सुराग के लिहाज से बेहद सुरक्षित पेजर का उपयोग आतंकी गतिविधियों में जरूर थोक में होने लगा। इसमें न जीपीएस होता है और न ही कोई आईपी एड्रेस, इसलिए लोकेशन ट्रेस का सवाल ही नहीं। इसका नंबर भी बदला जा सकता है। इसीलिए इसका पता लगाना आसान नहीं होता। बस इसी चलते एक बड़ी साजिश को अंजाम देकर बड़े षड्यंत्र के तहत 9/11 जैसी बल्कि उससे भी बहुत बड़े दायरे में लेबनान में हर...
भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र का विस्तृत क्षितिज

भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र का विस्तृत क्षितिज

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- अनीता प्रवीण भारत दुनिया की सबसे बड़ी एवं सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और इसका खाद्य प्रसंस्करण उद्योग आर्थिक विकास को गति देने एवं खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारत सरकार ने विभिन्न व्यावहारिक पहल के साथ-साथ सुधारों के नए युग की शुरुआत की है, जिसने भारत को तेजी से विकास के पथ पर ला खड़ा किया है। भारत सरकार की प्रगतिशील नीतिगत पहल एवं उपायों के कारण खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र ने हाल के वर्षों में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है और मैन्यूफैक्चरिंग के सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) में 7.66 प्रतिशत और वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान कृषि के जीवीए में 8.45 प्रतिशत का योगदान दिया है। समृद्ध एवं विविधतापूर्ण कृषिगत संसाधनों से लैस भारत वैश्विक स्तर पर खाद्य उत्पादन के मामले में महत्वपूर्ण शक्ति है। दूध, पोषक अनाज, खाद्यान्न, फल, सब्जियां, चाय और मछली जै...