Thursday, April 3"खबर जो असर करे"

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राजनीतिक दलों में मतभेद हों, मनभेद नहीं

राजनीतिक दलों में मतभेद हों, मनभेद नहीं

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सुरेश हिन्दुस्थानी ‘हम भारत के लोग’ यह मात्र एक शब्द नहीं, बल्कि यह राष्ट्रीय एकात्मता की प्रतिध्वनि को प्रकट करने वाला ऐसा शब्द है, जिससे हम प्रेरित हैं। जब हम इस शब्द को उच्चारित करते हैं तो सहज ही हमारे मन में एक ऐसी भावना निर्मित होती है, जो सबको एक परिवार की भांति देखने के लिए काफी है। लेकिन आज हमारे देश के राजनीतिक दल भारत की इस मूल भावना को विस्मृत करते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह बात सही है कि विचारों की भिन्नता हो सकती है, लेकिन मन में भिन्नता नहीं आनी चाहिए। अगर मन में भिन्नता का अंकुरण प्रस्फुटित होता है तो स्वाभाविक रूप से उसकी परिणति आक्रोश ही होगा। इसलिए आदर्श राजनीतिक विचार की परिभाषा यही है कि मतभेद तो होना चाहिए, लेकिन मनभेद नहीं। आज देश में मनों में भेद उत्पन्न करने की राजनीति की जा रही है। एक तरफ पाकिस्तान जैसा देश अपने नेटवर्क के माध्यम से भारत में मन भेद की कुत्सित चाल...
हिन्दू आस्था पर सेक्युलर प्रहार

हिन्दू आस्था पर सेक्युलर प्रहार

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डॉ. दिलीप अग्निहोत्री भारत में हिन्दू आस्था पर अमर्यादित बयान देना, फिल्म बनाना उसके पोस्टर जारी करना आदि कथित सेक्युलर दायरे में आता है। देश के लिए संतोष का विषय यह कि इसके विरोध में अराजक या हिंसक प्रदर्शन नहीं होता है। इसलिए अमर्यादित बयान देने वाले को कोई माफी मांगने का निर्देश नहीं देता। इसी बहाने वोट बैंक की राजनीति चलती रहती है। हिन्दू आस्था पर बनने वाली अमर्यादित फिल्म और डॉक्यूमेंट्री का प्रचार हो जाता है। ऐसा करने वाले बेखौफ रहते हैं। उन पर असहिष्णु और साम्प्रदायिक होने का आरोप नहीं लगता। उनके विरोध में सम्मान वापसी का अभियान नहीं चलता है, इनके कारण किसी अभिनेता की बेगम को भारत में रहने से डर नहीं लगता। किसी को तस्लीमा नसरीन और सलमान रुश्दी की तरह निर्वासित जीवन के लिए विवश नहीं होना पड़ता है। इसके लिए कोई पूर्व मुख्यमंत्री यह नहीं कहता कि इन्हें केवल मुंह से नहीं शरीर से भी म...
असंसदीय शब्दः फिजूल की बहस

असंसदीय शब्दः फिजूल की बहस

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- डॉ. वेदप्रताप वैदिक संसद के भाषणों में कौन से शब्दों का इस्तेमाल सदस्य कर सकते हैं और कौन से का नहीं, यह बहस ही अपने आप में फिजूल है। आपत्तिजनक शब्द कौन-कौन से हो सकते हैं, उनकी सूची 1954 से अब तक कई बार लोकसभा सचिवालय प्रकाशित करता रहा है। इस बार जो सूची छपी है, उसे लेकर कांग्रेस के नेता आरोप लगा रहे हैं कि इस सूची में ऐसे शब्दों की भरमार है, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के लिए विपक्षी सांसदों द्वारा इस्तेमाल किए जाते हैं। जैसे जुमलाजीवी, अहंकारी, तानाशाही आदि। दूसरे शब्दों में संसद तो पूरे भारत की है लेकिन अब उसे भाजपा और मोदी की निजी संस्था का रूप दिया जा रहा है। विरोधी नेताओं का यह आरोप मोटे तौर पर सही सा लगता है लेकिन वह अतिरंजित है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने साफ-साफ कहा है कि संसद में बोले जानेवाले किसी भी शब्द पर प्रतिबंध नहीं है। सभी शब्द बोले जा सकते हैं लेकिन अध्यक...