Friday, April 4"खबर जो असर करे"

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कितने भारतीय कमला हैरिस से ऋषि सुनक तक की कतार में

कितने भारतीय कमला हैरिस से ऋषि सुनक तक की कतार में

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- आर.के. सिन्हा अगर ब्रिटेन के नये प्रधानमंत्री ऋषि सुनक बने जाते हैं, तो वे एक तरह से उसी परंपरा को ही आगे बढ़ायेंगे, जिसका श्रीगणेश 1961 में सुदूर कैरिबियाई टापू देश गयाना में भारतवंशी छेदी जगन ने किया था। वे तब गयाना के निर्वाचित प्रधानमत्री बन गए थे। उनके बाद मॉरीशस में शिवसागर रामगुलाम से लेकर अनिरुद्ध जगन्नाथ, त्रिनिदाद और टोबैगो में वासुदेव पांडे, सूरीनाम में चंद्रिका प्रसाद संतोखी, अमेरिका में कमल हैरिस वगैरह उपराष्ट्रपति या प्रधानमंत्री बनते रहे। ये सभी उन मेहनतकश भारतीयों की संतान रहे हैं, जिन्हें गोरे दुनियाभर में लेकर गए थे, ताकि वे वहां के चट्टानों की सफाई कर वहां गन्ना की खेती कर लें। दरअसल सन 1834 में दुनिया में गुलामी प्रथा का अंत होने के बाद श्रमिकों की भारी संख्या में की जरूरत पड़ी। इसके बाद गोरे भारत से एग्रीमेंट करके मजदूर बाहर के देशों में ले जाने लगे जिन्हें बाद में...
द्रौपदी मुर्मू’’ क्या भारतीयों की राष्ट्रपति बन रही है या सिर्फ ‘‘आदिवासियों’’ की?

द्रौपदी मुर्मू’’ क्या भारतीयों की राष्ट्रपति बन रही है या सिर्फ ‘‘आदिवासियों’’ की?

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- राजीव खंडेलवाल ’’द्रौपदी मुर्मू’’के भारत की अगली राष्ट्रपति चुने जाने की संभावना को देखते हुए उन्हें हार्दिक अग्रिम बधाइयां। चूंकि वे देश की सर्वोच्च संवैधानिक पद ‘राष्ट्रपति’ के लिये चुनी जा रही है। अतः एक नागरिक का यह अधिकार व कर्तव्य है कि वे बधाई दे, शुभकामनाएं दे, व उनके उज्जवल भविष्य की कामना करें। ‘‘राष्ट्रपति’’ के रूप में अगले पांच सालों में वे देश का सफल नेतृत्व कर विश्व धरातल पर देश का नाम रोशन कर और ऊंचाइयों पर ले जाएं, इन्ही सब शुभकामनाओं के साथ पुनः बधाइयां। देश का एक नागरिक होने के नाते मैं भी उन्हें बधाई देता हूं। इसलिए नहीं कि वे देश की प्रथम आदिवासी राज्यपाल होकर, अब देश की प्रथम आदिवासी राष्ट्रपति होने जा रही है। बल्कि सामान्य पृष्ठभूमि से निकल कर वे देश के सर्वोच्च पद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समान पहुंची है। इसके लिए वे एक मूल भारतीय होने के नाते बधाई की पात्र...
कविता और लोकजीवन का मार्गदर्शन

कविता और लोकजीवन का मार्गदर्शन

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- ह्रदय नारायण दीक्षित जीवन और जगत को प्रकट करने के दो माध्यम हैं। पहला प्रत्यक्ष भौतिक जगत है। यह विज्ञान सिद्ध है। इसकी व्याख्या का मुख्य उपकरण बुद्धि है। तर्क बड़ा हथियार है। लेकिन तर्क पर्याप्त नहीं है। जीवन आनंद का अनुभव तर्क से नहीं होता। महाभारत के यक्ष प्रश्नों में युधिष्ठिर से यक्ष ने पूछा था- 'जीवन मार्ग क्या है? युधिष्ठिर ने यक्ष के प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा था-' ऋषि अनेक हैं। वेद वचन भिन्न-भिन्न हैं। धर्म का मूल तत्व स्पष्ट नहीं है। यह अति गहरी गुहा में है। तर्क की प्रतिष्ठा नहीं है। जीवन जगत के अध्ययन का यह विवरण बुद्धिगत है।' युधिष्ठिर ने अंत में यक्ष से कहा-' महाजनो येन गता सपंथाः।' महापुरुषों द्वारा बताया गया रास्ता ही सही मार्ग है। जीवन और संसार की व्याख्या का यह दृष्टिकोण भौतिक और संसारी है। लेकिन उसे समझने का दूसरा मार्ग भी है। यह मार्ग बौद्धिक नहीं है। अनुभूति और भा...
मर्यादा अनुरूप द्रोपदी मुर्मू का प्रचार

मर्यादा अनुरूप द्रोपदी मुर्मू का प्रचार

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- डॉ. दिलीप अग्निहोत्री राष्ट्रपति देश का संवैधानिक प्रमुख होता है। संघीय कार्यपालिका शक्तियों का संचलन प्रधानमंत्री के नेतृत्व में होता है। भारत में संसदीय शासन प्रणाली है। मंत्रिमंडल की सिफारिश और संसद द्वारा पारित विधेयक पर राष्ट्रपति हस्ताक्षर करते हैं। इसके बाद ही कानून बनता है। मूल संविधान में केवल यह उल्लेख था कि राष्ट्रपति मंत्रिमंडल की सलाह से कार्य करेंगे। इसका मतलब था कि राष्ट्रपति मंत्रिमंडल की सिफारिश और विधेयक को स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं। इंदिरा गांधी के कार्यकाल में संशोधन किया गया। इसके माध्यम से मंत्रिमंडल की सिफारिश को स्वीकार करना बाध्यकारी बनाया गया। जनता पार्टी सरकार के समय इसमें पुनः संशोधन किया गया। इसके अनुसार राष्ट्रपति मंत्रिमंडल की सिफारिश को पुनर्विचार के लिए एक बार वापस कर सकते हैं। दोबारा वह सिफारिश या प्रस्ताव के अनुरूप ही कार्य करेंगे। मतलब राष्ट्रप...
डिज्नीलैंडः मस्ती और रोमांच के 67 साल

डिज्नीलैंडः मस्ती और रोमांच के 67 साल

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- योगेश कुमार गोयल अमेरिका के कैलिफोर्निया के एनाहिम में स्थित ‘डिज्नीलैंड’ एक ऐसा मनोरंजन और थीम पार्क है, जहां दुनियाभर से आने वाले बच्चों के साथ-साथ बड़े भी मस्ती करते हैं। यह ऐसी जगह है, जहां कल्पनाओं से भरी अनूठी दुनिया हर किसी को आनंदित करती है। यह इतना विशाल मनोरंजन पार्क है कि इसके संचालन और देखभाल के लिए यहां 65 हजार से भी ज्यादा कर्मचारी हैं। ‘वाल्ट डिज्नी पार्क’ के स्वामित्व वाले डिज्नीलैंड की स्थापना 17 जुलाई, 1955 को हुई थी। इस दिन सजीव टेलीविजन प्रसारण के साथ डिज्नीलैंड का पूर्वावलोकन किया गया था। इसे आर्ट लिंकलेटर और रोनाल्ड रीगन द्वारा आयोजित किया गया था। अगले दिन 18 जुलाई को डिज्नीलैंड को आम लोगों के लिए खोल दिया गया था। एक डॉलर मूल्य का इसका सबसे पहला टिकट इसके संस्थापक वाल्ट डिज्नी के भाई ने खरीदा था। अब यहां के एक दिन के टिकट की कीमत सौ डॉलर से भी ज्यादा है। 05 दिसम्ब...
विशेष : बुद्धदेव ने की थी ईस्ट-वेस्ट मेट्रो की शुरुआत, ममता ने लगाया था अड़ंगा

विशेष : बुद्धदेव ने की थी ईस्ट-वेस्ट मेट्रो की शुरुआत, ममता ने लगाया था अड़ंगा

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कोलकाता, 16 जुलाई (एजेंसी)। भारत के सबसे पुराने शहरों में से एक कोलकाता की लाइफ लाइन बन चुकी मेट्रो रेलवे के इतिहास में नया अध्याय जोड़ते हुए केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने ईस्ट-वेस्ट मेट्रो रूट के सियालदह मेट्रो स्टेशन का उद्घाटन सोमवार को किया है। इस मेट्रो परियोजना की शुरुआत से लेकर इसके उद्घाटन और अन्य कार्यक्रमों पर राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को आमंत्रित करने के बावजूद आमंत्रित नहीं करने का बेबुनियाद दावा कर रही है। तृणमूल लगातार इस बात का दावा करती है कि रेल मंत्री रहते हुए ममता बनर्जी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को हरी झंडी दी थी लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है। वास्तविकता यह है कि ईस्ट वेस्ट मेट्रो परियोजना का शिलान्यास बुद्धदेव भट्टाचार्य के मुख्यमंत्रित्वकाल में हुआ था। उस समय कोलकाता मेट्रो रेल कारपोरेशन भारत सरकार के रेल मंत्रालय के अ...
जब शेर को मिला सवा सेर…

जब शेर को मिला सवा सेर…

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प्रभुनाथ शुक्ल हमारा लोकतंत्र कितना समदर्शी है। यहां इंसान की परेशानी और चिंताओं के साथ शेर, बाघ, मोर, घोड़े, गदहे भी गंभीर चिंतन का विषय बन जाते हैं। मीडिया की कृपा विशेष रूप से सोशल मीडिया की वजह से यह बहस सर्वव्यापी बन जाती है। जब बात राष्ट्रीय प्रतीकों और प्रतिमानों से जुड़ी हो तो यह और गंभीर हो जाता है।आजकल शेर और सवा शेर का प्रतीक सुर्खियों में है। अब आप ही बताइए क्या शेर से शांति की उम्मीद की जा सकती है। उस हालत में जब इंसान खुद आदमखोर बन गया है। फिर वह शेर से शांत और विनम्र बनने की उम्मीद भला कैसे कर सकता है। अब एक जमात शेर को गीदड़ बनाना चाहती है। आंगन कुटी में रहने वाले निंदक शेर को सवा सेर बनते नहीं देखना चाहते हैं। वह उसे गीदड़ बनाने पर तुले हैं। अब उन्हें कौन बताए वह खुद की भांति शेर को भी बनाना चाहते हैं। इसी शांतिपाठ में खुद का राज सिंहासन खाली हो गया और अब मेमना बने ...
भारत में ‘पुलिस राज’ कब खत्म होगा?

भारत में ‘पुलिस राज’ कब खत्म होगा?

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक सर्वोच्च न्यायालय ने भारत सरकार से दो-टूक शब्दों में अनुरोध किया है कि वह लोगों की अंधाधुंध गिरफ्तारी पर रोक लगाए। भारत की जेलों में बंद लगभग 5 लाख कैदियों में से लगभग 4 लाख ऐसे हैं, जिनके अपराध अभी तक सिद्ध नहीं हुए हैं। अदालत ने उन्हें अपराधी घोषित नहीं किया है। उन पर मुकदमे अगले 5-10 साल तक चलते रहते हैं और उनमें से ज्यादातर लोग बरी हो जाते हैं। हमारी अदालतों में करोड़ों मामले बरसों झूलते रहते हैं और लोगों को न्याय की जगह अन्याय मिलता रहता है। अंग्रेजों के जमाने में गुलाम भारत पर जो कानून लादे गए थे, वे अब तक चले आ रहे हैं। स्वतंत्र भारत की सरकारों ने कुछ कानून जरूर बदले हैं लेकिन अब भी पुलिसवाले चाहे जिसको गिरफ्तार कर लेते हैं। बस उसके खिलाफ एक एफआईआर लिखी होनी चाहिए जबकि कानून के अनुसार सिर्फ उन्हीं लोगों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए जिनके अपराध पर सात साल से ज...