Thursday, April 3"खबर जो असर करे"

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सर्वाइकल कैंसर को रोकने आरंभिक निदान और निवारण बेहतर उपाय 

सर्वाइकल कैंसर को रोकने आरंभिक निदान और निवारण बेहतर उपाय 

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अहमदाबाद ! अग्रणी हेल्थकेयर(स्वास्थ्य सेवा) प्रदाता अपोलो हॉस्पिटल्स-अहमदाबाद के अनुसार, सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर गुजरात और अन्य पड़ोसी राज्यों में एक मुख्य सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में उभरा है। विशेष रूप से, 35 से 55 वर्ष की आयु की महिलाओं में इसके मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। प्रति वर्ष अंदाजित 1.27 लाख नए मामलों के साथ, गर्भाशय ग्रीवा कैंसर भारत में महिलाओं में दूसरा सबसे सामान्य कैंसर है। इस संदर्भ में प्रादेशिक रुझान, गुजरात और पड़ोसी राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में रोग व्यापकता की चिंताजनक स्थिति दर्शाते हैं। अपोलो हॉस्पिटल्स-अहमदाबाद के अवलोकन के अनुसार, लोगों की जीवनशैली में बदलाव और जोखिम कारकों की प्रारंभिक शुरुआत के कारण, इन राज्यों से मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी गई है, जिनमें बडी संख्या में युवा महिलाएं भी शामिल हैं। स्थानां...
हरियाणा में जीतते-जीतते आखिर क्यों हार गई कांग्रेस!

हरियाणा में जीतते-जीतते आखिर क्यों हार गई कांग्रेस!

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- एडवोकेट डॉ. श्रीगोपाल नारसन हरियाणा के विधानसभा चुनाव परिणाम और रुझानों ने एक बार फिर एग्जिट पोल को झूठा साबित कर दिया । यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है। हरियाणा को लेकर जारी एग्जिट पोल पर खुशी मनाते कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए मतगणना का दिन अच्छा नहीं रहा। जम्मू-कश्मीर के चुनाव परिणाम भी कांग्रेस के लिए बहुत ज्यादा खुशी लेकर नहीं आए। नेशनल कॉन्फ्रेंस बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज हो रही है। उमर अब्दुल्ला का मुख्यमंत्री बनना तय माना जा रहा है। भाजपा जम्मू-कश्मीर में मजबूत विपक्ष के रूप में उभरी है। कांग्रेस जम्मू-कश्मीर के चुनाव में जम्मू क्षेत्र में यदि अच्छा प्रदर्शन करती तो शायद यह पार्टी और उसके भविष्य के साथ-साथ गठबंधन की सरकार को मजबूती प्रदान करता ,लेकिन परिणाम उसके उलट ही रहे। हार के कारणों को गिने तो 10 साल से सत्ता से बाहर रही का...
इसलिए बढ़ रहा स्वर्ण ऋण का चलन

इसलिए बढ़ रहा स्वर्ण ऋण का चलन

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- प्रहलाद सबनानी किसी भी देश के आर्थिक विकास को गति देने में पूंजी की आवश्यकता रहती है। तेज आर्थिक विकास के चलते यदि किसी देश में वित्तीय बचत की दर कम हो तो उसकी पूर्ति ऋण में बढ़ोतरी से की जा सकती है। भारत में ऋण सकल घरेलू अनुपात अन्य विकसित एवं कुछ विकासशील देशों की तुलना में अभी बहुत कम है। परंतु, हाल ही के समय में भारत का सामान्य नागरिक ऋण के महत्व को समझने लगा है एवं भौतिक संपत्ति के निर्माण में अपनी बचत के साथ साथ ऋण का भी अधिक उपयोग करने लगा है। कुछ बैंक सामान्यजन को ऋण प्रदान करने हेतु प्रतिभूति की मांग करते हैं। भारत में सामान्यजन के पास स्वर्ण के रूप में प्रतिभूति उपलब्ध रहती है अतः स्वर्ण ऋण बहुत अधिक चलन में आ रहा है। विशेष रूप से गैर बैंकिंग वित्तीय कम्पनियों द्वारा ऋण की प्रतिभूति के विरुद्ध स्वर्ण ऋण आसानी से उपलब्ध कराया जा रहा है। भारत में वित्तीय वर्ष 2022-23 की प्रथम त...
देवी उपासक है भारत का लोकजीवन

देवी उपासक है भारत का लोकजीवन

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- हृदयनारायण दीक्षित माँ प्रत्येक जीव की आदि अनादि अनुभूति है। हम सबका अस्तित्व माँ के कारण है। माँ न होती तो हम न होते। माँ स्वाभाविक ही दिव्य हैं, देवी हैं, पूज्य हैं, वरेण्य हैं, नीराजन और आराधन के योग्य हैं। मार्कण्डेय ऋषि ने ठीक ही दुर्गा सप्तशती (अध्याय 5) में “या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता बताकर नमस्तस्ये, नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमोनमः” कहकर अनेक बार नमस्कार किया है। माँ का रस, रक्त और पोषण ही प्रत्येक जीव का मूलाधार है। ऋषियों ने इसीलिए माँ को देवी जाना और देवी को माता कहा। मां के निकट होना आनंददायी है। हमारी भाषा में निकटता के लिए ‘उप’ शब्द का प्रयोग हुआ है। ‘उप’ बड़ा प्यारा है। इसी से ‘उपनिषद’ बना। उप से उपासना भी बना है। उपनिषद् का अर्थ है-ठीक से निकट बैठना। उत्तरवैदिक काल में इसका प्रयोग आचार्य और शिष्य की ज्ञान निकटता था। उपासना का अर्थ भी निकट होना है। उपवास का भी अर्थ ...
देश में मिलावट का कारोबार चरम पर

देश में मिलावट का कारोबार चरम पर

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- राकेश दुबे भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने ‘ईट राइट इंडिया’ अभियान के माध्यम से सभी भारतीयों के लिए सुरक्षित, स्वस्थ और पोषक भोजन सुनिश्चित करने के लिए देश की खाद्य प्रणाली को बदलने के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास शुरू किया है। खाने-पीने के शौकीन अथवा महानगरों में नौकरी आदि के चलते कम मूल्य लागत वाला भोजन तलाशने वाले भारतीयों के लिए यह अनिवार्य हो जाता है कि स्वाद एवं सस्ते के चक्कर में न पड़कर स्वच्छता मानकों एवं साफ-सफाई को अपनी सेहत के दृष्टिगत स्वच्छ एवं पौष्टिक भोजन को अपनी प्राथमिकता में रखें। भारत में बढ़ती आबादी के कारण और मांग एवं आपूर्ति में अंतर के चलते प्राय: खाद्य वस्तुओं की किल्लत और दामों में बढ़ोत्तरी होती ही रहती है और इसी किल्लत का फायदा जमाखोरों की टोलियां उठाने से नहीं चूकती हैं, तो वहीं घटिया एवं मिलावटी चीजें बेचने वालों की पौ-बारह हो जाती है। भारत में इन ...
आत्म शक्ति जाग्रत कर आरोग्य और यूनीवर्स की इनर्जी से जुड़ने की अवधि है नवरात्र

आत्म शक्ति जाग्रत कर आरोग्य और यूनीवर्स की इनर्जी से जुड़ने की अवधि है नवरात्र

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- रमेश शर्मा भारतीय चिंतन में तीज त्यौहार केवल धर्मिक अनुष्ठान और परमात्मा की कृपा प्राप्त करने तक सीमित नहीं है । परमात्मा के रूप में परम् शक्ति की कृपा आंकाक्षा तो है ही साथ ही इस जीवन को सुन्दर और सक्षम बनाने का भी निमित्त तीज त्यौहार हैं । इसी सिद्धांत नवरात्र अनुष्ठान परंपरा में है । इन नौ दिनों में मनुष्य की आंतरिक ऊर्जा को सृष्टि की अनंत ऊर्जा से जोड़ने की दिशा में चिंतन है । आधुनिक विज्ञान के अनुसंधान भी इस निष्कर्ष पर पहुंच गये हैं कि व्यक्ति में दो मस्तिष्क होते हैं। एक चेतन और दूसरा अवचेतन। इसे विज्ञान की भाषा में "कॉन्शस" और "अनकाॅन्शस" कहा गया है व्यक्ति का अवचेतन मष्तिष्क सृष्टि की अनंत ऊर्जा से जुड़ा होता है । जबकि चेतन मस्तिष्क संसार से । हम चेतन मस्तिष्क से सभी काम करते हैं पर उसकी क्षमता केवल पन्द्रह प्रतिशत ही है । जबकि अवचेतन की सामर्थ्य 85% है । सुसुप्त अवस्था में तो ...
इज़राइल-ईरान संघर्ष बढ़ा तो प्रभाव दुनिया भर में पड़ेगा

इज़राइल-ईरान संघर्ष बढ़ा तो प्रभाव दुनिया भर में पड़ेगा

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- ललित मोहन बंसल ईरान ने खाड़ी में अपने वर्चस्व के लिए आतंकवादी संगठनों-लेबनान में हिज़्बुल्लाह, फ़िलिस्तीन-गाजा में हमास और यमन में हाउती को खूब पाला-पोसा। अब इन्हीं की गलतियों की सजा अगर ईरान भुगतता है तो वह समझ ले कि शिया आतंकवादियों के माई-बाप आयतुल्ला खुमैनी को खाड़ी में सिर छुपाने की भी जगह नहीं मिलेगी? इज़राइल के यहूदी समुदाय की नसों में खून खौल रहा है। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहु विवश होते जा रहे हैं कि वह अपनी अंतिम चाल चल दें, वहीं रूस खुले तौर पर और चीन दबे स्वर में इज़राइल को घेरने की कोशिश में हैं। अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर खेमेबंदी जारी है। ध्यान में यह भी रहे कि अमेरिका में अगले महीने राष्ट्रपति चुनाव हैं। प्रतिष्ठा के इस चुनावी माहौल में डेमोक्रेट को चुनाव जीतना है तो राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार कमला हैरिस को इज़राइल के पक्ष में खुल कर सामने आना होगा। बेंजामिन...
नवरात्रि का नारी सशक्तिकरण का संदेश

नवरात्रि का नारी सशक्तिकरण का संदेश

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- डॉ. सौरभ मालवीय भारतीय पर्व हमारी सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं। इनसे हमें ज्ञात होता है कि हमारी प्राचीन संस्कृति कितनी विशाल, संपन्न एवं समृद्ध है। यदि नवरात्रि की बात करें तो यह पर्व भी भारतीय संस्कृति की महानता को दर्शाता है। विगत कुछ दशकों से देश में महिला सशक्तीकरण की बात हो रही है। कुछ लोग विदेशों के उदाहरण देते हैं कि वहां की महिलाएं सशक्त हैं तथा उन्हें बहुत से अधिकार प्राप्त हैं। किंतु ये लोग अपने देश के इतिहास पर चिंतन एवं मनन नहीं करते हैं। वास्तव में भारत विश्व का एकमात्र ऐसा देश है, जहां महिलाओं को पुरुषों के समान माना गया है। उदाहरण के लिए भारत में देवियों की पूजा-अर्चना की जाती है। यहां पर उन्हें भी देवताओं के समान ही पूजा जाता है, अपितु देवियों का स्थान देवता से पहले आता है जैसे राधा-कृष्ण, सीता-राम आदि। भगवान शिव के साथ देवी पार्वती की भी पूजा की जाती है। भगवान राम क...
महात्मा गांधी की जीवन दृष्टि

महात्मा गांधी की जीवन दृष्टि

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- गिरीश्वर मिश्र गांधीजी का जन्म उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में हुआ था, आधी बीसवीं सदी तक के दौरान वे भारतीय समाज और राजनीति की धुरी बन गए और अब इक्कीसवीं सदी में हम सब उनके मिथक से रूबरू हो रहे हैं। विश्वव्यापी अंग्रेजी साम्राज्य से अहिंसक लड़ाई के साथ उनका स्वाधीन भारत का स्वप्न सत्य हुआ। देश में रचनात्मक बदलाव के लिए वे सबको साथ ले कर चलते रहे। उनकी स्वीकार्यता का दायरा आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक यानी जीवन के सभी क्षेत्रों में निरंतर बढ़ता गया। संयम और आत्म-बल के साथ कर्मवीर गांधी ने जो ठाना उसे पूरा करने के लिए सर्वस्व लगा दिया। समाज के स्तर पर मानव कर्तृत्व की विरल गाथा बना उनका निजी जीवन पीड़ा, संघर्ष और अनिश्चय से भरा था। देश के लिए समर्पण की मिसाल बने गांधीजी अंतिम जन की मानवीय गरिमा की रक्षा के लिए की मोर्चों पर डटे रहे। वे देश के विभाजन और आजादी के साथ शुरू हुई हिंसा से क्षुब्ध और...