
मुंबई। स्वघोषित संत और भगोड़े नित्यानंद की मृत्यु की अफवाहों ने सोशल मीडिया पर हड़कंप मचा दिया। अब इन अफवाहों के जवाब में, नित्यानंद द्वारा स्थापित कथित राष्ट्र ‘कैलासा’ ने एक आधिकारिक बयान जारी कर दावों का खंडन किया है। बयान में कहा गया है कि नित्यानंद “स्वस्थ, सुरक्षित और सक्रिय” हैं और हाल ही में उन्होंने एक धार्मिक आयोजन में भी हिस्सा लिया था।
अफवाहों का दौर और कैलासा का जवाब
1 अप्रैल, 2025 को कई समाचार पोर्टलों और सोशल मीडिया पर यह खबर वायरल हुई कि स्वामी नित्यानंद की मौत हो गई है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि उसके भतीजे सुंदरेश्वर ने ही उसकी मृत्यु की घोषणा की थी, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। इन खबरों के बाद, कैलासा की ओर से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई, जिसमें इन अफवाहों को “दुर्भावनापूर्ण और अपमानजनक” करार दिया गया। बयान में यह भी कहा गया कि नित्यानंद ने 30 मार्च, 2025 को उगादी उत्सव के एक लाइव-स्ट्रीम कार्यक्रम में भाग लिया था, जिसका लिंक भी शेयर किया गया। कैलासा के प्रवक्ता ने कहा, “कई हिंदू-विरोधी मीडिया आउटलेट्स ने जानबूझकर यह झूठ फैलाया कि हिंदू धर्म के सर्वोच्च पोंटिफ (नित्यानंद) ने अपनी देह त्याग दी है। हम स्पष्ट रूप से घोषणा करते हैं कि वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और अपने आध्यात्मिक कार्यों में सक्रिय हैं।”
नित्यानंद का विवादित इतिहास
नित्यानंद का असली नाम राजशेखरन है और वह एक विवादास्पद स्वघोषित संत हैं। यौन शोषण का आरोपी कथित संत 2019 में भारत से फरार हो गया था। उस पर बलात्कार, यौन शोषण और बच्चों के अपहरण जैसे गंभीर आरोप हैं। गुजरात पुलिस ने उसके खिलाफ एक बच्चे के अपहरण के मामले की जांच शुरू की थी, जिसके बाद वह देश छोड़कर भाग गया। इसके तुरंत बाद, उसने दावा किया कि उसने ‘कैलासा’ नामक एक स्वतंत्र हिंदू राष्ट्र की स्थापना की है, जिसे वह “संयुक्त राज्य कैलासा” कहता है। हालांकि, इस कथित राष्ट्र की भौगोलिक स्थिति और वैधता पर सवाल उठते रहे हैं। कई विशेषज्ञ इसे एक काल्पनिक इकाई या घोटाला मानते हैं।
कैलासा का दावा और अंतरराष्ट्रीय विवाद
नित्यानंद ने दावा किया था कि कैलासा दक्षिण अमेरिका के इक्वाडोर के पास एक द्वीप पर स्थित है, लेकिन इसकी कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है। उसके संगठन ने संयुक्त राष्ट्र में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश की थी, जहां उसकी प्रतिनिधि विजयप्रिया नित्यानंद ने “हिंदुओं के उत्पीड़न” के खिलाफ आवाज उठाई थी। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र ने इसे मान्यता नहीं दी। हाल ही में, बोलीविया ने कैलासा के 20 सदस्यों को निर्वासित किया था, जिससे यह विवाद और गहरा गया।
बोलीविया में आव्रजन मंत्रालय ने कहा कि नित्यानंद के सदस्यों ने कथित तौर पर बोलीविया में स्वदेशी समुदाय की भूमि पर कब्जा करने का प्रयास किया। इसने कहा, “इन लोगों ने पर्यटकों के रूप में बोलीविया में प्रवेश किया, विभिन्न प्रवेश बिंदुओं के माध्यम से अलग-अलग समय पर पहुंचे। कुछ व्यक्ति नवंबर 2024 से बोलीविया में थे, जबकि अधिकांश जनवरी 2025 में आए।”
जनता और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
नित्यानंद की मृत्यु की अफवाहों और कैलासा के खंडन के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे अप्रैल फूल के मजाक से जोड़ा, तो कुछ ने इसे नित्यानंद के प्रचार का एक और हथकंडा बताया। एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “नित्यानंद मरे या जिंदा हो, उसके कैलासा का सच सामने आना चाहिए। यह सब एक बड़ा ढोंग लगता है।”
नित्यानंद की वास्तविक स्थिति और उनके ठिकाने के बारे में अभी भी रहस्य बना हुआ है। भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां उनकी तलाश में हैं, लेकिन वह अब तक कानून की पकड़ से बाहर हैं। कैलासा का यह ताजा बयान एक बार फिर नित्यानंद को सुर्खियों में लाया है