
Balbal, 18 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। Balbal, जो चतरा और हजारीबाग जिलों की सीमा के नज़दीक स्थित है, अपनी प्राकृतिक गर्मकुंड, मां बागेश्वरी मंदिर, उत्तरवाहिनी महाने नदी और प्राचीन पुरातात्विक अवशेषों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ के घने जंगल, पहाड़ और नदियाँ झारखंड की समृद्ध प्रकृति, आस्था और इतिहास को समेटे हुए हैं। नवरात्र में मां बागेश्वरी के दर्शन के लिये श्रद्धालु दूर-दराज से इकट्ठा होते हैं, जबकि मकर संक्रांति पर दस दिन का विशाल पशु मेला ग्रामीण संस्कृति को जीवंत कर देता है।
मां बागेश्वरी के दरबार में नवरात्र की रौनक विशेष है। मंदिर परिसर में भक्ति और पूजा के साथ-साथ शिवलिंग पर जल अर्पित कर शिव की पूजा भी की जाती है। यह स्थान गर्मकुंड के स्नान के साथ धर्म और प्रकृति का संगम प्रस्तुत करता है, जहाँ पानी में दाद, खाज व खुजली की समस्या में लाभ मिलने की मान्यता है।

उत्तरवाहिनी महाने नदी के तट पर मंदिर और गर्मकुंड की उपस्थिति श्रद्धालुओं को एक ही स्थल पर पूजा, स्नान और प्रकृति के सान्निध्य का अनुभव देती है। नदी की धारा और मंदिर की घंटियों की मधुर ध्वनि यहाँ के वातावरण को एक विशिष्ट अनुभव प्रदान करती है।
मकर संक्रांति के अवसर पर लगभग दस दिनों तक चलने वाला पशु मेला ग्रामीण जीवन, परंपराएँ और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को दर्शाता है। यह मेला न केवल खरीद-बिक्री का स्थान है बल्कि सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का भी माध्यम है।

Balbal के प्राचीन अवशेष और प्रतिमाएँ पालकालीन काल से सम्बद्ध मानी जाती हैं। डॉ. नीरज मिश्रा के अनुसार, यहाँ के अवशेषों का दस्तावेजीकरण और वैज्ञानिक अध्ययन इसे ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण बना सकता है।
भौगोलिक दृष्टि से, Balbal चतरा के मुख्यालय से लगभग 30 किमी पूर्व, गिद्धौर से 15 किमी पूर्व, पत्थलगड़ा से 12 किमी उत्तर-पूर्व और हजारीबाग के कटकमसांडी से 7 किमी पश्चिम स्थित है। इस स्थान पर प्राकृतिक गर्मकुंड, धार्मिक स्थल, नदी, प्राचीन प्रतिमाएँ और पारंपरिक पशु मेला एक साथ मौजूद हैं, जिससे यह झारखंड का एक संभावनाशील पर्यटन केंद्र बनता है। साफ-सफाई, सुरक्षित स्नान व्यवस्था, पेयजल, शौचालय और मार्गदर्शक संकेतों जैसी बुनियादी सुविधाएँ विकसित करके इसे व्यापक पहचान दिलाई जा सकती है।
