मौजूदा वर्ष की तीसरी तिमाही के दौरान पहली बार सोने की डिमांड 100 अरब डॉलर के स्तर को पार कर गई है। जानकारों का कहना है कि इस साल सोने की कीमत में आई जोरदार तेजी के लिए मुख्य रूप से इजरायल और ईरान के बीच बने जंग जैसे हालात, रूस और यूक्रेन यूक्रेन में जारी जंग और सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल असद की विद्रोहियों से हुई हार को जिम्मेदार माना जा सकता है। इन तीनों वजहों से सेफ इन्वेस्टमेंट के रूप में सोने की मांग में तेजी आई।
बुलियन मार्केट एक्सपर्ट मयंक मोहन के अनुसार साल 2024 में कई देशों के केंद्रीय बैंक लगातार सोने की खरीदारी करते रहे। साल 2025 में भी केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की खरीदारी जारी रहने की उम्मीद जताई जा रही है। इस तरह अगले साल भी सोने के सबसे बड़े लिवाल अलग-अलग देशों के बैंक ही रहने वाले हैं। इसके अलावा ज्वेलरी मार्केट में भी इस साल तेजी बने रहने की उम्मीद है। इसलिए ज्वेलरी हाउसेस की ओर से भी फिजिकल गोल्ड की खरीदारी में तेजी होगी। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि सोना साल 2025 में भी सरपट चाल में भागता रहेगा। इस बीच यदि जियो-पॉलिटिकल टेंशन में बढ़ोतरी हुई, तो इन्वेस्टर भी बड़ी तादाद में गोल्ड में इन्वेस्टमेंट करेंगे, जिसकी वजह से सोने के भाव में और तेजी आ सकती है।
कैपेक्स गोल्ड एंड इन्वेस्टमेंट्स के सीईओ राजीव दत्ता का कहना है कि अमेरिकन फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती किए जाने की वजह से निवेशकों के लिए सोना आकर्षण का केंद्र बन गया है। इसके साथ ही महंगाई के खतरे को देखते हुए भी कई बड़े निवेशकों ने सोने में पैसा लगाने का फैसला किया है, जिसकी वजह से इस धातु की कीमत में लगातार तेजी आई है। आने वाले दिनों में भी सोने में तेजी का अनुमान लगाया जा रहा है। खासकर, जेपी मॉर्गन, गोल्डमैन सैक्स और सिटी ने साल 2025 में सोने की कीमत बढ़ कर 3,000 से 3,100 डॉलर प्रति ऑन्स तक पहुंच जाने की उम्मीद जताई है।
इस साल 30 अक्टूबर को फिजिकल गोल्ड 2,788.54 डॉलर प्रति ऑन्स के सर्वोच्च स्तर तक पहुंच गया था। सोने की कीमत में नवंबर में भी तेजी जारी रहने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव का परिणाम आ जाने के कारण गोल्ड मार्केट में निराशा का महल बन गया, जिसकी वजह से सोने की कीमत में गिरावट आ गई। लेकिन अब एक बार फिर इस धातु की कीमत में तेजी का रुख बनने लगा है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का अनुमान है कि 2025 के दौरान सोना एक सीमित दायरे में तेजी दिखा सकता है। काउंसिल ने अपनी आउटलुक रिपोर्ट 2025 में कहा है कि अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था 2025 में अनुमान के मुताबिक रहती है, तो सोने में उछाल आने की संभावना बनेगी। इसके साथ ही अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को लेकर नरम रुख अपनाया, तो इससे भी गोल्ड मार्केट को ट्रिगर मिलेगा और सोने में तेजी आएगी। लेकिन अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने विपरीत रुख दिखाया, तो सोने के भाव पर प्रतिकूल असर भी पड़ सकता है। (हि.स.)