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राहत वाला शुक्रवार

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डेस्क। नई दिल्ली। देश में अब 50,000 रुपए तक सोना खरीदने पर पेन कार्ड और आधार कार्ड देना जरूरी नहीं रहेगा। यानी अब 50,000 तक की खरीददारी पर सरकार को जानकारी नहीं देनी पड़ेगी। साथ ही सरकार ने ज्वैलरी सेक्टर को पीएमएलए (सरकार ने प्रिवेंशन आॅफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002) के दायरे से बाहर कर दिया है।

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की बैठक में यह फैसला लिया गया। इसमें छोटे कारोबारियों और ज्वेलर्स को राहत दी गई है। जीएसटी परिषद ने शुक्रवार को डेढ़ करोड़ तक के टर्नओवर वाले कारोबारियों को हर महीने रिटर्न दाखिल करने से छूट दे दी है। अब कारोबारियों को तीन महीने पर रिटर्न दाखिल करना होगा। इसके अलावा एक और बड़ा फैसला लेते हुए रत्न और गहनों को जीएसटी नोटिफिकेशन के दायरे से बाहर कर दिया गया है। अब इसके लिए नया नोटिफिकेशन लाया जाएगा। सर्राफा व्यापारियों को दो लाख तक की खरीदी पर स्थाई खाता संख्या (पेन) देना भी जरूरी नहीं होगा।

जीएसटी में तकनीकी समस्याओं को सुलझाने के लिए बनाए गए ग्रुप आॅफ मिनिस्टर्स (जीओएम) के मुखिया एवं बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है। बैठक खत्म होने के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि कंपाउंडिंग स्कीम के तहत भी 75 लाख टर्नओवर की सीमा को बढ़ाकर एक करोड़ कर दिया गया है। ऐसे कारोबारी 3 महीने पर कुल बिक्री का एक फीसदी टैक्स जमाकर विवरण दाखिल कर सकेंगे।

कंपाउंडिंग डीलरों को दूसरे राज्यों में माल बेचने का अधिकार और इनपुट सब्सिडी का लाभ देने के लिए 5 सदस्यीय मंत्री समूह के गठन का फैसला हुआ है। सुशील मोदी ने ट्वीट में लिखा है कि रिवर्स चार्ज की व्यवस्था को अगसे साल 31 मार्च तक स्थगति कर दिया गया है। इसके तहत पहले रजिस्टर्ड करदाताओं को अनरजिस्टर्ड आपूर्तिकर्ता से माल खरीदने पर टैक्स देना पड़ता था। अब 31 मार्च तक इससे राहत दे दी गई है। इसके साथ ही निर्यातकों को 10 अक्टूबर से जुलाई का और 18 अक्टूबर से अगस्त का जीएसटी रिफंड मिलेगा।

इसके अलावा एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक ज्वेलर्स को भी राहत दी गई है। सरकार ने रत्न और गहनों को जीएसटी नोटिफिकेशन के दायरे से बाहर कर दिया गया है। अब इसके लिए विचार करने के बाद अलग से नोटिफिकेशन लाया जाएगा।

सर्राफा कारोबारियों को भी राहत दी गई है. अब 2 लाख रुपये की तक की खरीदारी पर पैन देना जरूरी नहीं होगा, पहले 50 हजार रुपये से ज्यादा की खरीदारी पर पेन देना अनिवार्य था।

यह भी बहुत खास
इसके साथ ही मोदी सरकार को काले धन और शेल कंपनियों के खिलाफ जारी जंग में उस वक्त बड़ी कामयाबी मिली, जब 13 बैंकों ने अपनी एक रिपोर्ट में सरकार को 2,09,032 संदिग्ध कंपनियों में से कुछ के बैंक खातों के आॅपरेशन तथा नोटबंदी के बाद के जमा-निकासी को लेकर बेहद अहम जानकारी दी। गौरतलब है कि इसी साल रजिस्ट्रार आॅफ कंपनीज ने इन संभी कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया था, जिसके बाद इन कंपनियों के बैंक खातों को सिर्फ देनदारियां चुकाने के लिए इस्तेमाल किए जाने की बंदिश लागू हो गई थी।

अब 13 बैंकों ने आंकड़ों की पहली किस्त सरकार को सौंपी है, जिसमें दो लाख से भी ज्यादा कंपनियों में से सिर्फ 5,800 कंपनियों के 13,140 बैंक खातों की जानकारी दी गई है। इनमें से कुछ कंपनियों के नाम तो 100-100 से भी ज्यादा खाते हैं। इनमें से एक कंपनी के नाम कुल 2,134 बैंक खाते हैं, जबकि कई अन्य के नाम 900 खाते भी हैं।

लेकिन बैंकों द्वारा सरकार को दी गई सबसे अहम जानकारी नोटबंदी के दौरान इन खातों में की गई जमा-निकासी से जुड़ी है। बताया गया है कि लोन खातों को अलग कर दिए जाने के बाद इन 5,800 कंपनियों के खातों में 8 नवंबर, 2016 को उनके पास कुल 22.05 करोड़ रुपये की रकम बची थी, लेकिन 9 नवंबर, 2016 (नोटबंदी का लागू होना) से रजिस्ट्रेशन रद्द किए जाने तक की अवधि में इन कंपनियों ने 4573.87 करोड़ रुपये की रकमें जमा करवाईं, और लगभग इतनी ही रकम, यानी 4,552 करोड़ रुपये की निकासी भी की।

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