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बेटियों के हालात पर जताई चिंता

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संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र (संरा) का कहना है कि विश्व की 1.1 अरब बालिकाएं शक्ति, ऊर्जा और सृजनात्मकता की प्रतीक हैं, लेकिन इनमें से लाखों बालिकाएं अनेक संकटों और विषम स्थितियों का सामना कर रही हैं जिस पर तत्काल ध्यान दिए जाने की जरूरत है।  संयुक्त राष्ट्र आबादी कोष(यूएनएफपीए) की कार्यकारी निदेशक डॉ. नतालिया कानेम ने आज अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर कहा कि लाखों बालिकाओं को अनेक विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है जिन पर वैश्विक स्तर पर ध्यान दिए जाना चाहिए।

इस वर्ष बालिका दिवस की थीम ‘एम्पॉवर गर्ल्स: बिफोर,ड्यूरिंग एंड आफ्टर क्राइसिस’ है। उन्होंने कहा कि संकटग्रस्त लाखों बालिकाओं और उनके परिवारों को जीवन के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है और उनके पास कोई अन्य विकल्प भी नहीं है। ये बालिकाएं बाल विवाह, यौन और ंिलगभेद आधारित समस्याओं , मानव तस्करी,बलात्कार और यौन दासता जैसी अमानवीय परिस्थतियों का सामना कर रही हैं।

संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार वर्ष 2017 में 12 करोड़ 86 लाख लोगों को तत्काल मानवीय सहायता की आवश्यकता है और इनमें से एक तिहाई बालिकाएं तथा महिलाएं हैं। यूनेस्को की महानिदेशक इरिना बोकोवा ने इस मौके पर कहा, ह्यबालिकाओं के सशक्तीकरण और उनके कल्याण के बिना कोई भी समाज प्रगति नहीं कर सकता है और न ही कोई शांति समझौता स्थायी तौर पर लागू हो सकता है। अब समय आ गया है कि बालिकाओं से जुड़े सभी मुद्दों पर ध्यान दिया जाए और उनके सशक्तीकरण के लिए दीर्घ कालीन योजनाएं बनाई जाएं।ह्ण

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