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जिस शख्स ने ‘शोले’ को दिलाया इकलौता फिल्मफेयर, गरीबी में हुई उसकी मौत

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मुंबई.

15 अगस्त को रमेश सिप्पी के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘शोले’ की रिलीज को 42 साल हो गए हैं। फिल्म में दोस्ती, रोमांस, एक्शन और ट्रैजिडी सब कुछ डाला गया। साथ ही इसे बखूबी एडिट किया एमएस शिंदे ने। ‘शोले’ को 9 कैटेगरी में 23वे फिल्मफेयर के लिए नोमिनेट किया गया लेकिन अवॉर्ड सिर्फ बेस्ट एडिटिंग के लिए एमएस शिंदे को मिला। कम ही लोग जानते हैं कि बेस्ट एडिटर बना ये शख्स काफी तंगी के दौर से गुजरा। इसी गरीबी के कारण 28 सितंबर 2012 में उनकी डेथ हो गई।

शिंदे को नहीं मिली आर्थिक मदद...

एमएस शिंदे और छोटी बेटी अचला

– अपने फिल्मी करियर में करीब 100 फिल्मों की एडिटिंग करने वाले एमएस शिंदे की 83 साल की उम्र में मौत को गई थी।
– लगभग 35 साल इंडस्ट्री को देने के बाद शिंदे अंतिम दिनों में काफी होपलैस हो गए थे।
– डेथ से पहले 2011 में एक लीडिंग वेबसाइट को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपनी तंगी के बारे में बताया था।
– दरअसल शिंदे 160 स्क्वेयर फीट के घर में अपनी छोटी बेटी अचला के साथ रहा करते थे। लेकिन करीब 6 महीने बाद फैमिली को सेंट्रल मुंबई में शिफ्ट होना पड़ा।
– किन्हीं कारणों से उनकी ये नई बिल्डिंग गिर गई और वो कैम्प में शिफ्ट कर दिए गए। उन्हें नहीं पता था कब तक यहां कैम्प में वो रहेंगे।
– बातचीत में उन्होंने बताया था कि वो फिल्म एडिटर एसोसिएशन को उनकी तंगी के लिए लैटर भी लिख चुके थे।
– ऐसे में एसोसिएशन की तरफ से उन्हें एक बार सिर्फ 5000रु. की हेल्प मिली थी इसके बाद कोई उन्हें देखने तक नहीं पहुंचा था। इस वाकए के बाद शिंदे ने इंडस्ट्री से आशा ही छोड़ दी थी।
बॉलीवुड स्टार्स से नहीं मांगी मदद
– शिंदे ने किसी बॉलीवुड स्टार्स से मदद नहीं मांगी थी। क्योंकि उनका मानना था कि स्टार्स पैसों और अपने इंट्रेस्ट के लिए काम करते हैं।
– उनका कहना था, “चाहे फिर वो अमिताभ बच्चन हो, जया बच्चन या फिर कोई सेलिब्रिटी। सेलेब क्यों किसी और के लिए काम करेंगे। इसीलिए मैं किसी के पास मदद के लिए नहीं गया।”
कई प्रॉड्यूसर्स ने नहीं दिए शिंदे के पैसे
– शिंदे की बेटी अचला ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता ने किसी से पैसों के लिए मदद नहीं मांगी थी।
– बकौल अचला, “कई प्रोड्यूसर्स ने पापा के काम के बाद भी पैसे नहीं दिए थे। ना ही वो कभी उनसे मांगने गए।”
– “पापा को मदद सिर्फ महाराष्ट्र नवनिर्माण चित्रपट कर्मचारी सेना से मिली। उन्होंने ने ही उनकी मोतियाबिंद की सर्जरी कराई और दूसरे मेडिकल खर्चे उठाए थे।”
– “पापा को अमय कोपकर और शालिनी ठाकरे ने 51000रु. दिए थे और उनकी देखरेख का पूरा जिम्मा उठाया। साथ की बैरिस्टर एआर अंतुले ने उन्हें हर महीने 500रु. देने का वादा किया था।”

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